विकास के नाम पर होने वाले विनाश में जल, जंगल और जमीन के साथ अब पहाडों का नाम भी जुड़ गया है। पहाड़ के विनाश में उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश सीधे निशाने पर हैं। मनुष्य अपने जीवन की अंतहीन आवश्यकताओं…
पर्यावरणविद् सुंदरलाल बहुगुणा की चौथी पुण्यतिथि पर प्रसिद्ध समाजसेवी सोनम वांगचुक ने कहा उत्तराखंड राज्य की राजधानी देहरादून में प्रसिद्ध पर्यावरणविद् स्व० सुंदरलाल बहुगुणा की चौथी पुण्यतिथि पर चिपको आंदोलन के प्रख्यात लोक कवि स्व० घनश्याम सैलानी जी को मरणोपरांत…
बड़ी,बारहमासी नदियों का दोहन करने की सरकारी हुलफुलाहट के साथ-साथ सत्तर के दशक से समाज ने भी इन पर गौर करना और जरूरी हो तो प्रतिरोध करना शुरु कर दिया है, लेकिन इन विशालकाय जल-भंडारों को पोषित करने वाली छोटी,…
यह जानने के लिए किसी रॉकेट-साइंस की जरूरत नहीं है कि इंसानी वजूद के लिए वन और उनके साथ पर्यावरण का संरक्षण कितना जरूरी है, लेकिन सरकार से लेकर समाज तक का कोई भी तबका इसे अपेक्षित अहमियत देता नहीं…
वन विभागों की मार्फत कथित ‘सांटिफिक फॉरेस्ट्री’ उर्फ ‘वैज्ञानिक वानिकी’ की आजमाइश के डेढ़ सौ से ज्यादा साल गुजर जाने के बावजूद आज वन, वन्यप्राणी और वनों में बसे आदिवासी बदहाल ही नजर आते हैं। इसके बरक्स जंगल से अपनी…
हिमालय और उसके राज्यों की मौजूदा आपदाएं आत्महंता विकास के विकराल नमूने बनते जा रहे हैं। इंसान अपना अंत किस नासमझी से जानबूझकर रचता है इसे देखना-समझना हो तो हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड राज्यों की मौजूदा हालातों का जायजा लिया…
सब जानते हैं कि जलवायु परिवर्तन की मौजूदा त्रासदी की वजह धरती पर बसे इंसानों की हवस पर आधारित जीवन-पद्धति है, लेकिन कोई इसे रोकना, बदलना नहीं चाहता। वैश्विक स्तर पर भी ठीक यही हालत है और तरह-तरह के जमावडों…