कुछ दिन पहले उत्तराखंड के ख्यात सामाजिक कार्यकर्ता त्रेपन सिंह चौहान हमसे सदा के लिए विदा हुए हैं। प्रस्तुत है, उनके साथी रहे सुरेश भाई के ये संस्मरण। हिमालय पर्वत की तरह अपने ही स्थान पर अडिग रहने वाले त्रेपन…
सिर्फ सरकारों के भरोसे प्रकृति-पर्यावरण की रक्षा नहीं हो सकती, उसमें समाज को हाथ बंटाना पड़ता है। यह काम यदि किसी अच्छी, बरसों पुरानी सामाजिक परम्परा की मार्फत होने लगे तो जाहिर है, वे अधिक मजबूत और स्थायी होते हैं।…
मुकुट यानि क्राउन के आकार के कोरोना वायरस ने अपनी बीमारी कोविड-19 की मार्फत समूची दुनिया को हलाकान कर दिया है। इसकी उत्पत्ति की कई वजहें गिनाई जा रही हैं, लेकिन उन सबका जोड आधुनिक विकास के लिए प्रकृति से…
नदियों में लगातार बढ़ती गाद नदियों के अस्तित्व के लिए खतरा बनती जा रही है। पिछले 60 वर्षों में नदियों में निरन्तर घट रही जल राशि के कारण कई नदियां सूख रही है। गंगा नदी की अविरलता में अब तक…