राजेंद्र चौधरी

अमीरी के मापदंड : अमरीका और यूरोप में कौन बेहतर?

दुनिया भर में सम्पन्नता मापने का प्रचलित पैमाना ‘सकल घरेलू उत्पाद’ (जीडीपी) ‘आर्थिक वृद्धि दर’ से ही उपजा है, लेकिन क्या यह किसी देश की वास्तविक सम्पन्नता को उजागर कर सकता है? इसी पैमाने पर अमरीका को यूरोप से अधिक…

Pension scheme बेमानी हैं, दोनों तरह की पेंशन योजनाएं

पिछले कुछ दिनों से देश भर में पेंशन को लेकर भारी मारामारी मची है। हिमाचलप्रदेश जैसे राज्यों में तो यह मसला चुनाव हराने-जिताने की गारंटी तक हो गया था। क्या है, इसके पीछे की कहानी? और क्या पेंशन की मौजूदा…

निर्यात हेतु ‘जीएम’ बासमती नहीं, तो देशवासियों के लिए ‘जीएम’ सरसों क्यों?

खेती में अनेक सरकारी हस्तक्षेपों की तरह ‘जीन-संवर्धित’ बीजों को लाने के पीछे भी उत्पादन बढाने का बहाना किया जा रहा है, लेकिन क्या बिना जांच-पडताल के किसी अज्ञात कुल-शील बीज को खेतों में पहुंचाना ठीक होगा? सरसों और धान…

शिक्षा : किताबें हमारी विरासत

कहा जाता है कि किताबें हमारी विरासत का दस्तावेज होती हैं और इसलिए किताबों को घर-घर में जगह दी जानी चाहिए, किताबें केवल स्कूली न हों और न ही केवल स्कूली बच्चों को पढ़नी चाहिए, अपितु सबको पढ़नी चाहिये क्योंकि…

स्कूटर से सस्ता है, हवाई जहाज चलाना

डीजल, पेट्रोल की आसमान छूती कीमतों के लिए केन्द्र और राज्यों की सरकारों के भारी-भरकम टैक्स जिम्मेदार माने जाते हैं, लेकिन इनमें भी गैर-बराबरी साफ दिखाई देती है। जहां आम गरीब, निम्न और मध्यंमवर्ग के जरूरी वाहन स्कूटर-कार में डाले…

लोकतंत्र में लालफीताशाही

तरह-तरह के कानून-कायदों को बनाते हुए सरकारों का एक तर्क यह भी रहता है कि इससे लालफीताशाही या इंस्पेक्टर-राज काबू में आ जाएगा। तो क्‍या लालफीताशाही और इंस्‍पेक्‍टर-राज को लोकतंत्र की ही कमजोरी माना जा सकता है? आम जनता, अर्थशास्त्रियों और…

कोरोना : करने योग्‍य, जरूरी बातें

तीस जनवरी को केरल में पहले मरीज की पहचान होने के बाद कोरोना वायरस से फैली कोविड-19 बीमारी को अब तक लंबा वक्‍त और अनुभव गुजर गए हैं। करीब साढे सात महीने के दुखद दौर के बाद भी कई लोग…

अध्‍यादेशों ने अकेला कर दिया किसान को

कोरोना संकट के एन बीचम-बीच सरकार ने जून 2020 में किसानों से जुडे तीन अध्‍यादेश जारी किए हैं। इनमें मंडी, ‘न्‍यूनतम समर्थन मूल्य,’ ‘संविदा खेती’ जैसे किसानी मुद्दों का जिक्र करते हुए मौजूदा कृषि-व्‍यवस्‍था को कॉर्पोरेट खेती के हित में…