कुमार सिद्धार्थ

स्वयंसेवी कार्यकर्ताओं को जमीनी एवं व्यावहारिक सच्‍चाईयों के साथ काम करना चाहिए – पद्मश्री डॉ. जनक पलटा मगिलिगन

भोपाल, 29 सितंबर। स्वयंसेवी संस्थाओं की नेटवर्किंग एवं कार्यकर्ताओं के दक्षता विकास में संलग्‍न एनजीओ पाठशाला ने अपने द्वितीय स्‍थापना दिवस के मौके पर 28 सितम्बर को समर्थन संस्था परिसर, भोपाल में अंतरराष्‍ट्रीय ख्याति प्राप्‍त वरिष्‍ठ सामााजिक कार्यकर्त्‍ता पद्मश्री डॉ….

क्‍या हम बचा पाएंगे अपने जंगल ?

वनों के महत्व को समझने-समझाने में हम लगातार चूक कर रहे हैं। इसका सबसे बड़ा प्रमाण यही है कि हम लगातार वनों को खोते जा रहे हैं। भारतीय वन सर्वेक्षण चाहे कितना भी दावा कर लें, पर वनों का प्रतिशत…

चिकित्‍सक डॉ. चेतन एरन की फोटो प्रदर्शनी ने बिखेरा प्रकृति, वन्‍य जीवन और सौन्दर्य का जादू

इंदौर। पेशे से चिकित्‍सक और शौकिया तौर पर फोटोग्राफी करने वाले डॉ. चेतन एरन के चुनिंदा फोटोग्राफ्स की तीन दिवसीय प्रदर्शनी ( 11 से 13 फरवरी 2022 ) ‘फोटो थेरेपी’ प्रीतमलाल दुआ कला विथिका में रविवार को सम्‍पन्‍न हुई । इस…

Tiger : अपने ही बसेरों में बेहाल बाघ

वन्‍य प्राणी आधुनिक, ‘वैज्ञानिक वानिकी’ में पारंगत हमारे वन विभागों के मंहगे अमले के बावजूद वन और उसमें बसे वन्यप्राणी बच नहीं पा रहे हैं। इस मौजूदा तौर-तरीके में पीढियों से वनों और वन्यप्राणियों के साथ सहजीवन जीते आदिवासियों को…

स्वामी अग्निवेश : बेबाक, प्रखर, निर्भीक व्यक्तित्व को अंतिम सलाम

स्‍मृति शेष : श्रध्‍दांजलि न्याय, समता, बराबरी और जन समर्थक के पक्षधर रहे स्वामी अग्निवेश के अवसान से एक निरपेक्ष व्यक्तित्व का मौन हो जाना है। वे प्रखरता र्और मुखरता से कई मुददों पर अपने विचार रखते थे। वे बंधुआ…

चिकित्सा और ई वेस्ट का निपटान: उपेक्षित नजरिया

प्रतिदिन 550.9 टन चिकित्सा अपशिष्ट उत्सर्जित करने वाला और 70 प्रतिशत इलेक्ट्रॉनिक कचरे को पैदा करने वाला अपना देश दुनिया का पाँचवां सबसे बड़ा देश है। मोबाइल फोन, कंप्यूटर और ढेरों इलेक्ट्रॉनिक गैजेट्स की रद्दी में भरमार हैं, लेकिन इन…

रिश्तों की मित्रता, मित्रता के रिश्ते

भारतीय संत परम्परा के आधुनिक चिंतकों में आचार्य विनोबा भावे का नाम शीर्षस्थ है। कई विषयों पर उनका चिंतन मौलिक और सबसे अलग हटकर है। मसलन-वे मानते हैं कि सभी रिश्तों में मित्रता सर्वोपरि है और आम मानवीय संबंधों को…

क्या प्रदूषण को काबू कर सकते हैं, बिजली के वाहन?

दुनियाभर में वायु प्रदूषण के लिए वाहनों की बढ़ती संख्या भी जिम्मेदार है। फैलते बाजार और उसकी मार्फत कमाए जाते राजस्व ने सरकारों को इसे अनदेखा करने को उकसाया भी है, लेकिन बढ़ते तापक्रम और नतीजे में जलवायु परिवर्तन की…

आचार्य विनोबा भावे : सच्चे अर्थ में लोकशाही कहीं नहीं है

11 सितंबर : विनोबा जयंती पर विशेष हर महापुरूष का सोचने-विचारने और चिंतन का अपने निराला ढंग होता है। अपने चिंतन का जो नवनीत अपने जीवनकाल में वे समय-समय पर समाज का परोसते हैं-वह समाज-जीवन में चल रहे व्यवहार के…