अरविन्द मोहन

विकास : आँकड़े बदले हैं, गरीबी नहीं

आज फिर चुनावी राजनीति में गरीब और खास तौर से गरीबों की संख्या मुद्दा बनती जा रही है और संभव है काफी सारे मुद्दे हवा में उछालकर टेस्ट कर चुकी मोदी सरकार को अपनी यह ‘उपलब्धि’ चुनाव जिताने लायक लगे।…

न्यायपालिका बनाम सरकार : कौन किसे सुधारे ?

जजों की नियुक्ति संविधान की धारा 217 के तहत होती है जिसमें आरक्षण की बात ही नहीं है। लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने 1993 के अपने चर्चित फैसले मे साफ कहा था कि नियुक्तियों के समय समाज के सभी वर्गों के…

परिवहन : गायब होती गाड़ियां

कंडम मानकर रद्द की जाने वाली दिल्ली की गाड़ियों को देखें तो पर्यावरण का संरक्षण सीधा परिवहन के विरोध में खड़ा दिखाई देता है। दस साल पुरानी डीजल और पन्द्रह साल पुरानी पैट्रोल गाड़ियों के खारिज कर देने से कार…

शराब गोरखधंधा : शराब से सम्पन्न सरकारें

राष्ट्रपिता महात्मा गांधी ने अपने ‘एक दिन के डिक्टेटर’ बनने पर जिस शराब को पूरी तरह प्रतिबंधित करने के मंसूबे बांधे थे, वही शराब सरकारों की राजस्व उगााही का बडा स्रोत बन गई है। शराबबंदी का मुद्दा उभरते ही हर…

आकाशवाणी : कृत्रिम बदलाओं की सीमा

आकाशवाणी को भी कई लोग ज्यादा संस्कृतनिष्ठ और भगवाकरण की मुहिम से जोड़कर देख सकते हैं। पर यह बताना जरूरी है कि यह नाम कविवर रवीन्द्रनाथ ठाकुर ने 1956 में दिया था लेकिन अंगरेजी समेत दूसरी भाषाओं का प्रसारण आल…