अमरपाल सिंह वर्मा

संविधान की रोशनी में गणतंत्र : गरीब कैदियों के लिए इंसाफ की पुकार

संविधान का सर्वाधिक महत्वपूर्ण काम उसे अमल में लाना है, खासकर उन लोगों के लिए जो अपनी आर्थिक, सामाजिक और राजनीतिक परिस्थितियों के चलते आजादी के अस्सी साल बाद भी हाशिये पर ही हैं। राजस्थान हाईकोर्ट ने हाल में एक…

डिजिटल हमलों से डरती महिलाएं

शारीरिक और यौन हिंसा से अक्सर निपटने वाली महिलाओं के सामने ‘डिजिटल हिंसा’ के रूप में अब एक नया ‘जानवर’ खड़ा हो गया है। विडंबना यह है कि आमतौर पर अदृश्य इस जानवर से निपटने के लिए कोई प्रभावी हथियार…

भरत सिंह कुंदनपुर : पंचायती राज मंत्री से पंच बन गांव की सेवा करने वाले नेता का जाना

राजस्थान की राजनीति में भरत सिंह कुंदनपुर का नाम उस विरले नेता के रूप में लिया जाएगा, जिसने मंत्री पद की शोहरत छोड़ गांव की गलियों को चुना। पंच बनकर उन्होंने साबित किया कि राजनीति का अर्थ सत्ता नहीं, समाज…

World No Tobacco Day : बीस साल की तम्बाकू नियंत्रण संधि  

सब जानते हैं कि तम्बाकू मानव-स्वास्थ्य के लिए बेहद हानिकारक है, लेकिन कोई उसके उत्पादन पर रोक लगाने की अगुआई नहीं करना चाहता। बीस साल पहले ‘विश्व स्वास्थ्य संठन’ की पहल पर दुनियाभर के देशों ने एक ऐसी संधि पर…

गोरैया : कहां गायब हो गई यह छोटी चिडिय़ा?

गोरैया को बचाना केवल पर्यावरण की नहीं, बल्कि हमारी भावनाओं और संस्कृति की भी जरूरत है। यह चिडिय़ा हमारे बचपन की साथी रही है, हमारे आंगन की रौनक रही है। इसे वापस लाना है तो इसके लिए हमें अपने घरों,…

अन्तर्राष्ट्रीय महिला दिवस : मूत्रालयों के लिए महिलाओं का संघर्ष

यह शर्मनाक है कि आजादी की तीन चौथाई सदी गुजर जाने के बाद भी हमारी आधी आबादी को साफ-सुथरे शौचालय तक नसीब नहीं हैं। यह बदहाली सार्वजनिक स्थलों पर इतनी तकलीफदेह हो जाती है कि मुम्बई के एक एनजीओ को…

अदालत के फैसले से सुधरेगा, डॉक्टरों का शुद्धलेख

इलाज और दवाओं के लिए लिखी जाने वाली डॉक्टरों की पर्ची अक्सर न तो इलाज के बारे में मरीज या उसकी तीमारदारी में लगे लोगों को कुछ स्पष्ट बता पाती है और न ही दवा-विक्रेताओं को। ऐसे में हाल में…

प्रयागराज महाकुंभ : सुनो तो गंगा क्या सुनाए?

प्रयागराज में महाकुंभ के समापन से पहले गंगा और यमुना के जल की शुद्धता को लेकर सवाल उठ खड़े हुए हैं। ‘केन्द्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड’ (सीपीसीबी) और ‘उत्तरप्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड’ (यूपीपीसीबी) की जांच का निष्कर्ष विरोधाभासी है। प्रयागराज में…

डॉक्टरों की बढ़ती आत्महत्याएं : चिकित्सकों को चिकित्सा की जरूरत

भांति-भांति की सामाजिक-आर्थिक-राजनीतिक समस्याओं के अलावा खुद के मुकाबले मरीजों की बढ़ती संख्या डॉक्टरों को गहरे तनाव का शिकार बना रही है। नतीजे में जीवन देने वाले डॉक्टर खुद अपनी जान लेने को उतारू हो रहे हैं। आखिर क्यों हो…

देसी खिलौनों की खत्म होती चमक

कम्प्यूटर, मोबाइल और इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों की मार्फत फैल रहे आभासी संसार के बावजूद बच्चों में आज भी पारंपरिक खिलौनों के प्रति उत्साह बाकी है। सरकारी आंकड़े तक इसकी तस्दीक करते हैं कि भारत ने खिलौना-बाजार में खासी बढ़त बनाई है,…