Year: 2025

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Γιατί το Bizzo Casino είναι η καλύτερη επιλογή για εσάς

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5 लाख पेड़ों को काटने का रास्ता साफ़ : हसदेव अरण्य में केंते एक्सटेंशन कोल ब्लॉक को वन विभाग की हरी झंडी    

छत्तीसगढ़ विधानसभा संकल्प को दरकिनार कर अडानी के पक्ष में वन स्वीकृति का निर्णय तत्काल वापस लिया जाए रायपुर, 5 अगस्‍त। हसदेव अरण्य क्षेत्र में स्थित केंते एक्सटेंशन कोल ब्लॉक Kente Extension Coal Block में कोयला खनन हेतु वन भूमि…

दिशोम गुरु शिबू सोरेन : आदिवासी अस्मिता के प्रतीक

शिबू सोरेन के निधन के साथ झारखंड की राजनीति का एक युग समाप्त हो गया। ‘दिशोम गुरु’ के नाम से लोकप्रिय रहे सोरेन ने आदिवासी अधिकारों, महाजनी शोषण, शराबबंदी और झारखंड राज्य की मांग को लेकर जीवनभर संघर्ष किया। टुंडी…

एक क्लिक में समूची दुनिया से जुड़ने की क्रांति है WWW

1 अगस्त को मनाया जाने वाला ‘वर्ल्ड वाइड वेब दिवस’ उस तकनीकी क्रांति को स्मरण करने का अवसर है, जिसने दुनिया को एक डिजिटल मंच पर जोड़ दिया। टिम बर्नर्स-ली द्वारा विकसित WWW ने ज्ञान, संवाद और सूचना की दुनिया…

जीवनदायनी नदियां : नदियों को नालों में बदलता समाज

यह जानने के लिए कोई भारी–भरकम शोध की जरूरत नहीं है कि देशभर की तमाम छोटी-बडी नदियां बदहाल हैं और उनमें से अधिकांश अपने आखिरी दिन गिन रही हैं। सचराचर जगत की जीवनदायिनी नदियां आखिर क्यों इतनी बेहाल हैं? क्या…

युद्धकाल : बूचड़खाने में बदलती दुनिया

महात्मा गांधी कहा करते थे कि यदि ‘आंख के बदले आंख निकाली जाए तो अंत में समूची दुनिया अन्धी हो जाएगी।’ कौन जानता था कि गांधी की विदाई के 77 साल बाद यह बात कहावत से निकलकर कड़वी सच्चाई में…

मुंशी प्रेमचंद: जिन्होंने आम आदमी को साहित्य का नायक बनाया

मुंशी प्रेमचंद हिन्दी साहित्य के वो युगपुरुष हैं, जिनकी लेखनी ने आम आदमी की पीड़ा, सामाजिक कुरीतियों और आज़ादी की भावना को शब्द दिए। उन्होंने उपन्यास, कहानी, नाटक और लेखों के माध्यम से साहित्य को जन-सरोकारों से जोड़ा और हिन्दी…

स्वस्थ और सुखी रहना है तो प्रकृति के साथ जीना होगा

28 जुलाई को मनाया जाने वाला ‘विश्व प्रकृति संरक्षण दिवस’ हमें इस सच्चाई से रूबरू कराता है कि लगातार मानवीय गतिविधियों और प्रकृति से छेड़छाड़ के चलते मौसम चक्र असंतुलित हो चला है। ग्लोबल वार्मिंग, बाढ़, सूखा, वनों की आग…

युद्ध, टेक्नोलॉजी और लोकतंत्र

इंसान का आपस में साथ रह पाना कितना कठिन होता जा रहा है? क्या एक-दूसरे के बीच का फासला इतना गहरा हो गया है कि युद्ध के बिना इसे पाटा नहीं जा सकता? इसी मानवीय कमजोरी की पड़ताल करता विवेकानंद…

विनाश को विस्तार देते युद्ध !

आजकल दुनियाभर में जारी युद्धों की अमानवीय क्रूरता, वीभत्स हिंसा और असंख्य मौतों के नतीजे में आखिर क्या मिलता है? दवाओं जैसी अकूत पूंजी कूटते, हथियारों के सौदागरों की कमाई के अलावा इनसे किसी पक्ष को, किसी तरह की कोई…