Year: 2025

World Biofuel Day : मानव जीवन के सुनहरे भविष्य की निधि बन सकता है जैव ईंधन

जलवायु परिवर्तन और पारंपरिक जीवाश्म ईंधन पर अत्यधिक निर्भरता के कारण बढ़ते पर्यावरणीय संकट के बीच जैव ईंधन एक टिकाऊ और स्वच्छ विकल्प के रूप में उभर रहा है। 10 अगस्त को मनाया जाने वाला विश्व जैव ईंधन दिवस ग्रीनहाउस…

चुनाव आयोग : बिहार में बाहरी वोटर-एक शिगूफा

विधानसभा चुनाव के एन पहले बिहार में किए जा रहे मतदाता सूचियों के ‘एसआईआर’ यानि ‘विशेष गहन पुनरीक्षण’ में एक बात बाहरी, खासकर बांग्लादेशी फर्जी मतदाताओं की भी कही जा रही है। ‘चुनाव आयोग’ के अज्ञात ‘सूत्रों’ के हवाले से…

आदिवासी जीवन एवं प्रकृति दर्शन : टिकाऊ भविष्य की ओर

हर वर्ष 9 अगस्त को मनाया जाने वाला विश्व आदिवासी दिवस, उन समुदायों के जीवन दर्शन और प्रकृति संग सह-अस्तित्व की अनूठी परंपरा को सम्मानित करने का अवसर है। जंगल, जल और जमीन से गहरे जुड़े आदिवासी समाज का ज्ञान,…

World Indigenous Day : मौजूदा विकास के विपरीत है,  आदिवासी जीवन  

आदिवासी समाज की बदहाली को देखना-समझना चाहें तो आसानी से उस संवेदनहीनता पर उंगली रखी जा सकती है जिसे लेकर सत्ता, सेठ और समाज आदिवासियों को अपनी तरह के विकास की चपेट में फांसने में लगे हैं। कमाल यह है…

खादी स्वतंत्रता व स्वावलंबन की प्रतीक है, राष्ट्र की आत्मनिर्भरता इसी पर टिकी है-  डॉ. संजय सिंह

भोपाल के गांधी भवन में राष्ट्रीय हथकरघा दिवस पर विचार गोष्ठी का आयेाजन भोपाल, 8 अगस्‍त। राष्ट्रीय हथकरघा दिवस पर विचार गोष्ठी में मुख्य अतिथि के तौर पर बात रखते हुए केंद्रीय गांधी स्‍मारक निधि के मंत्री एवं गांधी भवन…

प्राकृतिक व जैविक खेती ही समाधान

देश के गृह व सहकारिता मंत्री अमित शाह ने ‘प्राकृतिक’ और ‘जैविक’ खेती की पैरवी करते हुए खुद को इन पद्धतियों का प्रशंसक बताया था। केन्द्रीय कृषि बजट के 70 फीसदी को उर्वरक सब्सीडी में लगाने वाली सरकार के वरिष्ठ…

 लोकतंत्र में दो धमाके !

अभी कुछ दिन पहले हुई दो महत्वपूर्ण घटनाओं ने सभी का ध्यान खींचा है। इनमें से एक तो 2006 के मुंबई बम धमाकों में, जो ‘7/11 ब्लॉस्ट’ के नाम से जाना जाता है, 18 साल से जेल भुगत रहे सारे…

प्राकृतिक आपदा : उत्तराखंड में जल-प्रलय

उत्तराखंड के उत्तरकाशी में खीरगंगा और धराली में फटे बादलों ने एक बार फिर देवभूमि को तबाही के कगार पर ला खड़ा किया है। 50 से अधिक घर, 30 होटल और 100 से ज्यादा लोग लापता हैं। यह कोई आकस्मिक…

नागासाकी : अनुशासन, मौन और शांति का समवेत स्वर

पिछले साल नवंबर में हमारे द्वारा की गई जापान यात्रा के दौरान जब हम नागासाकी पहुँचे, तो वह पल केवल एक भ्रमण नहीं, बल्कि आत्ममंथन का अनुभव बन गया। शांति और विनाश की स्मृतियों से घिरे इस शहर ने हमें…

हिरोशिमा की राख से उठते सवाल

6 अगस्त 1945 को हिरोशिमा पर परमाणु बम गिराकर मानवता ने विज्ञान के सबसे क्रूर प्रयोग का साक्षी बनाया। यह सिर्फ एक शहर की तबाही नहीं, बल्कि चेतना, करुणा और सहअस्तित्व की अवधारणा पर गहरा घाव था। ‘हिरोशिमा दिवस’ आज…