लेखक संजय अग्रवाल की पुस्तक ‘365 डिग्री’ का विमोचन इंदौर, 6 अक्टूबर। इंदौर की रविवार की सुबह साहित्य, विचार और आत्मसंवाद की एक खूबसूरत संगति में तब बदल गई, जब लेखक संजय अग्रवाल की पुस्तक ‘365 डिग्री’ का लोकार्पण हुआ।…
देश में रासायनिक और प्राकृतिक खेती के बीच जारी बहस को एक नए अध्ययन ने नया मोड़ दिया है। रामकृष्ण मिशन विवेकानंद एजुकेशनल एंड रिसर्च इंस्टीट्यूट द्वारा किए गए अध्ययन में पाया गया कि प्राकृतिक खेती न तो आय में…
देश में जीएसटी घटाने की चर्चा “स्वदेशी” के नाम पर हो रही है, पर असल में यह कदम गरीबों पर पड़े कर के बोझ को घटाने की बजाय बड़े पूँजीपतियों को राहत देने जैसा है। स्वदेशी का अर्थ आत्मनिर्भरता, समानता…
ठीक एक शताब्दी पहले, 1925 के दशहरे के इन्हीं दिनों में ‘राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ’ की स्थापना हुई थी। उसके कर्ता-धर्ताओं की नजर में गैर-राजनीतिक, सांस्कृतिक संगठन माना जाने वाला यह अ-पंजीकृत जमावडा अपने जन्म से ही विवादास्पद रहा है। क्या…
जन स्वास्थ्य अभियान इंडिया (मध्यप्रदेश व राजस्थान इकाई) द्वारा दोषियों पर दंड और गुणवत्ता नियंत्रण तंत्र की जवाबदेही तय करने की अपील इंदौर/छिंदवाड़ा/जयपुर, 05 अक्टूबर। मध्यप्रदेश और राजस्थान में जहरीले रसायनों से युक्त कफ सिरप पीने से हुई बच्चों की…
इंदौर, 4 अक्टूबर। हिंदी में कहानी का कलेवर आमतौर पर छोटा होता है और उपन्यास या लंबी कहानी की तरह उसमें एक से ज़्यादा मुद्दे उठाने की गुंजाइश नहीं होती। दिनेश भट्ट अपनी कहानी में यह जोख़िम उठाते है और…
आम लोगों में महात्मा गांधी को उनके रहन-सहन, खान-पान और भाषा-भूषा के चलते गैर-आधुनिक, पिछडा और पारंपरिक मानने का चलन है, लेकिन क्या वे सचमुच वैसे थे? या आधुनिकता के उनके मापदंड आम लोगों से भिन्न थे, जिनका वे कडाई…
भोपाल, 2 अक्टूबर। गांधी भवन,भोपाल के मुख्य सभागार में आयोजित गांधी जयंती समारोह में प्रदेश के राज्यपाल माननीय मंगू भाई पटेल ने कहा कि महात्मा गांधी के विचार और आदर्श नई पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का प्रतीक हैं। उन्होंने युवाओं…
बनारस घराने की ठुमरी परंपरा के जीवंत स्तंभ और पद्मभूषण पंडित छन्नूलाल मिश्रा का 89 वर्ष की आयु में निधन हो गया। उनके स्वर में ठुमरी, कजरी, चैती और दादरा का वह अद्वितीय संगम था जिसने शास्त्रीयता को लोकजीवन की…
महात्मा गांधी ने हिंद स्वराज में जिस ‘सभ्यता’ को हालात कहा था, वही आज के जलवायु संकट की जड़ बन चुकी है। बापू ने सौ साल पहले चेतावनी दी थी कि अगर दुनिया यूरोप-अमेरिका के उपभोगवादी रास्ते पर चली, तो…