आज 1 फरवरी को वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा वित्त वर्ष 2024-25 के लिए भारत का आम बजट पेश किया जाएगा। बजट निर्माण की पूरी जिम्मेदारी वित्त मंत्रालय की ही होती है और यह लगातार छठा ऐसा अवसर है, आज 1 फरवरी को…
आज से 76 साल पहले महात्मा गांधी हम सबसे सदा के लिए विदा हुए थे। उनके जाने के बाद का समय हमारे सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक विकास का समय रहा है, लेकिन इस दौर में गांधी एक प्रस्थान–बिन्दु की तरह…
धरती का जीवन बचाने की खातिर वैश्विक जमावडे ‘कॉप 28’ की विफलताओं के सामने अब महात्मा गांधी खडे किए जा रहे हैं और कमाल यह है कि यह पहल मौजूदा संकटों को पैदा करने वाले पश्चिमी समाज की तरफ से…
राममनोहर लोहिया ने जिन्हें ‘सरकारी’ और ‘मठी’ गांधीवादी कहा था उनमें से अधिकांश ने अपने निजी और सार्वजनिक व्यवहार से गांधी को एक बेहद नीरस, कला विरोधी और मालवी में कहें तो लगभग ‘सूमडा’ की तरह स्थापित किया है। इसके…
बदनावर में पर्यावरण संगोष्ठी का आयोजन बदनावर, 25 जनवरी। पर्यावरण डाइजेस्ट मासिक पत्रिका के प्रकाशन के गौरवशाली 37 साल पूरे होने के अवसर पर बुधवार शाम यहां चंद्रलीला पैलेस में बदनावर नगर परिषद के सहयोग से पर्यावरण संगोष्ठी का आयोजन…
75 वें गणतंत्र दिवस पर विशेष संविधान की अवधारणा भारत को एक संपूर्ण प्रभुत्व संपन्न एवं लोकतंत्रात्मक गणराज्य के रूप में स्थापित करती है। यही हमारा धर्मग्रंथ है। नागरिकों के आर्थिक एवं राजनीतिक न्याय के साथ प्रतिष्ठा एवं अवसर की…
ध्यान से देखें तो आज के दौर की समस्याओं, खासकर निजी समस्याओं को आपसी भरोसे के बल पर निपटाया जा सकता है, लेकिन विडंबना है कि इस मामूली बात को कोई समझना नहीं चाहता। कैसे इस भरोसे को पुनर्स्थापित किया…
आजादी के साढ़े सात दशकों बाद भी सीवर-सेप्टिक टेंक की सफाई में जान देते अनेक सफाईकर्मी हमारे विकास का ही मुंह नहीं चिढाते, बल्कि उस सामाजिक ताने-बाने को भी शर्मिंदा करते हैं जिसमें एक तबके को दूसरे की वीभत्स गंदगी…
सब जानते हैं कि जलवायु परिवर्तन की मौजूदा त्रासदी की वजह धरती पर बसे इंसानों की हवस पर आधारित जीवन-पद्धति है, लेकिन कोई इसे रोकना, बदलना नहीं चाहता। वैश्विक स्तर पर भी ठीक यही हालत है और तरह-तरह के जमावडों…