नागरिकों का सैन्यकरण या सेना का नागरिकीकरण ?
आम नागरिक कारण जानना चाहता है कि एक तरफ़ तो सरकार अरबों-खरबों के अत्याधुनिक लड़ाकू विमान और अस्त्र-शस्त्र आयात कर सशस्त्र सेनाओं को सीमा पर उत्पन्न चुनौतियों का सामना करने के लिए तैयार करना चाहती है और दूसरी ओर आने…
जल, जंगल, जमीन पर हक, किसान, मछुआरे, मजदूर और हाशिए पर खड़े समुदाय के संघर्षों को तेज करने का संकल्प
जन आंदोलनों का राष्ट्रीय समन्वय के राष्ट्रीय समन्वयकों की दो दिवसीय बैठक 17-18 जून को गांधी भवन, भोपाल में सम्पन्न हुई । देश 16 राज्यों से आए जानदोलनों के नेताओं ने अपने राज्यों चल रहे संघर्षों के बारे में चर्चा…
बाल अपराधों की रोकथाम : सामाजिक आंदोलन आवश्यक
बच्चों के विरूद्ध अपराधों के मामलों में कानूनी प्रावधान अत्यावश्याक है। लेकिन कानून के साथ ही सामाजिक जागरूकता भी अत्यावश्यक है। इसे कानून के साथ ही सामाजिक समस्या अधिक माना जाना चाहिए। इस हेतु सामाजिक आंदोलन की आवश्यकता है जिससे…
हमारा पैसा हमारा हिसाब : वापस आया कोयले संकट, क्या है इसके पीछे की कहानी
भारत बिजली की कमी और कोयला संकट से जूझ रहा है। दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा कोयला उत्पादक देश अपने बिजली संयंत्रों को माल उपलब्ध कराने में लगातार विफल क्यों हो रहा है? केंद्र सरकार मांग में वृद्धि का अनुमान…
चे ग्वेवारा : संघर्षरत जनता का वैश्विक प्रतिनिधि
दुनियाभर के युवाओं में आज भी खासे लोकप्रिय चे ग्वेवारा को अमेरिका की ‘टाइम’ पत्रिका ने बीसवीं सदी के सौ ‘सर्वाधिक महत्वपूर्ण व्यक्तित्वों’ में से एक माना है। आखिर कैसे बनते हैं, चे सरीखे युवा क्रांतिकारी? उनके आसपास की राजनैतिक,…
विवाद में मौतें : कोविड की कहानी
पिछले दिनों ‘विश्व स्वास्थ्य संगठन’ ने दुनियाभर में कोविड-19 से हुई मौतों के आंकडे जारी किए हैं। इनमें भारत के आंकडे भी शामिल हैं, लेकिन केन्द्र सरकार ने उन्हें ‘बढा-चढाकर दिए गए आंकडे’ कहकर खारिज कर दिया है। क्या है,…
आदिवासियों की बदहाली के संवैधानिक गुनहगार
संविधान में आदिवासियों को मिले विशेष दर्जे को आमतौर पर अनदेखा किया जाता रहा है। मसलन – राज्यपालों को अनुसूचित क्षेत्रों में विशेषाधिकार दिए गए हैं, ताकि वे आदिवासियों की विशिष्ट जीवन पद्धतियों, खान-पान और भाषा आदि को देखते हुए…
हमें चाहिए प्रोग्रेसिव स्कूल, जहां मिले बेहतर शिक्षा और समान अवसर : सोनाझारिया मिंज
17वीं अखिल भारतीय जन विज्ञान कांग्रेस में पर्यावरण, कृषि, आजीविका, लैंगिक समानता जैसे विषयों पर विमर्श भोपाल, 8 जून। 17वीं अखिल भारतीय जन विज्ञान कांग्रेस में पर्यावरण, कृषि, आजीविका, लैंगिक समानता जैसे विषयों पर आज सेमिनार एवं कार्यशालाओं का आयोजन…
कहां मिलेंगी किताबें : किताबों के सपने की मौत
लेखन, पत्रकारिता, जनांदोलन, जनहित की पैरवी जैसे कामों की वजह से प्रसिद्ध, गोवा के क्लॉड और नोर्मा अल्वारिस किताबों की अपनी दुकान ‘अदर इंडिया बुक स्टोर’ के कारण भी सामाजिक, गैर-दलीय राजनीतिक और एनजीओ बिरादरी में पहचाने जाते हैं। पिछले…
विश्व पर्यावरण दिवस : मौसम की भट्टी में भुनते शहर
हर साल की तरह इस साल भी वैज्ञानिकों ने ‘न भूतो, न भविष्यति’ की तर्ज पर तापक्रम बढने की चेतावनियां दी हैं, लेकिन लगता है, इससे किसी को कोई फर्क नहीं पडता। यदि पडता, तो कम-से-कम हमारे शहर और उनमें…









