Year: 2021

विस्थापन और पुनर्वास के मुद्दे पर लंबा, प्रभावशाली और अहिंसक कोई दूसरा आंदोलन नहीं

नर्मदा बचाओ आंदोलन : संघर्ष और रचना के 36 वर्ष नर्मदा बचाओ आंदोलन ने देश और दुनिया में वैकल्पिक विकास के मॉडल की ओर ध्यान आकृष्ट करने में सफलता पाई है । दुनिया के इतिहास में जमीनी स्तर पर विस्थापन…

विभाजन विभीषिका स्‍मृति : अतीत की स्मृतियों की ओर धकेलने का मकसद

आज़ादी के वक्त हुए विभाजन की विभीषिका का ईमानदार नीयत से किया जाने वाला कोई भी स्मरण उन आंतरिक विभाजनों को नियंत्रित करेगा जो नागरिकों को अलग-अलग समूहों में बाँटकर उन्हें अपनी स्वतंत्रता के प्रति आशंकित कर सकते हैं। इतना…

पेड़-पौधों की सौगात है, प्राणवायु

कोविड-19 महामारी ने हमारे आसपास अपने गंधहीन, रंगहीन स्वरूप में मौजूद तत्व ऑक्सीजन की अहमियत उजागर कर दी है। यह ऑक्सीजन या प्राणवायु प्रकृति के जिस खजाने से मिलती है, उसकी हम कितनी परवाह करते हैं? क्या हम खुद अपने…

2030 तक 450 गीगावॉट रिन्यूबल ऊर्जा हासिल करने की भारत की प्रतिबद्धता : विशेषज्ञ

देश के 75वें स्वतंत्रता दिवस के मौके पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लाल किले से दिए अपने भाषण में जहाँ तमाम महत्वपूर्ण घोषणाएं की, उनमें सबसे ख़ास रही राष्ट्रीय हाइड्रोजन मिशन की स्थापना की घोषणा, जिसके अंतर्गत भारत को ग्रीन…

जी20 देशों की 73 फ़ीसद जनता मानती है पृथ्वी महाविनाश के मुहाने पर

“दुनिया के सबसे धनी देशों के रहने वाले अधिसंख्‍य लोग भी ठीक वहीं बात महसूस करते हैं,जो हम कर रहे हैं। वे धरती की स्थिति को लेकर चिंतित हैं और इसे बचाना चाहते हैं।मुझे लगता है कि इससे दुनिया भर…

वैश्विक पर्यावरण : जलवायु परिवर्तन से बढ़ेंगे चक्रवात

विडंबना है कि मानव सभ्यता की समाप्ति का संकट खुद मानव-निर्मित हो गया है। मसलन – लगातार बढ़ते चक्रवात, वायुमंडल और समुद्र के बढ़ते तापक्रम की वजह से पैदा हो रहे हैं और तापक्रम बढ़ने की वजह रोजमर्रा की मानवीय…

नर्मदा बचाओ आंदोलन के 36 साल पूरे होने पर जन संसद का आयोजन

बडवानी । नर्मदा बचाओ आंदोलन के 36 वर्ष पूर्ण होने पर बडवानी में आज किसान मजदूर जन संसद का आयोजन किया गया। जिसमें मध्य प्रदेश ,गुजरात और महाराष्ट्र के हजारों किसानों ने शिरकत की। वहीं नर्मदा घाटी के गांव गांव…

संकट में सफाई कामगारों की सेहत

सभी के जानते-बूझते समाज का एक तबका मानवीय गंदगी को ढोने, साफ करने के ऐसे काम में आज भी लगा है जिसे किसी हालत में मानवीय नहीं कहा जा सकता, लेकिन सत्ता, समाज और सरकारें उसकी तरफ इस कदर मुंह…

देशवासियों के नमन पर नाम बदलने का ‘खेला’ !

शासकों को हक़ हासिल रहता है कि वे अपनी जनता के नाम, पते, और कामों को देश की ज़रूरत के मुताबिक़ बदल सकें। इतिहास में ऐसे उदाहरण भी तलाशे जा सकते हैं। इस समय तो देश में सब कुछ ही…

अधूरे सपनों की आजादी

74वें स्वतंत्रता दिवस (15 अगस्त) पर विशेष देश के पहले प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू ने स्वाधीनता आंदोलन के नेताओं के सपनों और आकांक्षाओं का अत्यंत सारगर्भित वर्णन अपने प्रसिद्ध भाषण (ए ट्रिस्ट विथ डेस्टिनी) में किया था। उन्होंने कहा था ‘जिस…