Year: 2020

नाकाबिल जन-प्रतिनिधि

सात दशक पहले, आजादी के आसपास के महात्‍मा गांधी को देखें तो इन सवालों के जबाव पाए जा सकते हैं। केवल दो बातों – आर्थिक और राजनीतिक के बारे में गांधी क्‍या कहते थे? गांधी विचार की प्राथमिक पाठशाला का…

महिलाओं के समाधान के लिए सृजनात्मक सोच की आवश्यकता है

सुभद्रा खापर्डे विश्व ग्रामीण जीवन में महिला सृजनात्मकता पुरस्कार से सम्‍मानित 15 अक्‍टूबर। वुमेन’स वर्ल्ड समिट फ़ाउंडेशन (wwsf) स्विट्ज़रलैंड, द्वारा वर्ष 2020 का “ग्रामीण जीवन में महिला सृजनात्मकता पुरस्कार” विश्व के 10 महिलाओं को दिया गया है जिनमें मध्‍यप्रदेश के…

विकल्प खोजनेवाले समाजवादी कार्यकर्ता सोमनाथ त्रिपाठी

समाजवाद, न्याय और समता के लिए होनेवाले संघर्षों को सोमनाथ जी ( सोमनाथ त्रिपाठी) के निधन से भारी क्षति हुई है। हाल ही में 9 अक्टूबर को कोरोना संक्रमित होने से उनका देहावसान हो गया। जब भी ऐसे संघर्ष आगे…

जड़ें बहुत गहरी हैं टीआरपी के फ़र्ज़ीवाड़े की !

देशभर में अनुमानतः जो बीस करोड़ टीवी सेट्स घरों में लगे हुए हैं और उनके ज़रिए जनता को जो कुछ भी चौबीसों घंटे दिखाया जा सकता है, वह एक ख़ास क़िस्म का व्यक्तिवादी प्रचार और किसी विचारधारा को दर्शकों के…

अंदरूनी अत्याचारियों से विद्रोह चाहते थे लोहिया

लोहिया की विद्रोही चेतना अपने ढंग की अनोखी है। वह इतिहास की जरूरी बहसों को बढ़ाती है और व्यर्थ की बहसों को शांत करते हुए उसमें सामंजस्य बिठा देती है। डा. लोहिया अगर भगत सिंह और गांधी के बीच सेतु…

सिंगरौली का स्याह सच

साठ के दशक में रिहंद बांध की नींव रखते हुए तब के राजनेताओं, खासकर तत्‍कालीन प्रधानमंत्री पं. जवाहरलाल नेहरू को इस पहल के नतीजों का कोई भान शायद ही रहा हो। देश की ऊर्जा राजधानी खडी करने के जुनून ने…

कृषि के ताजा कानूनों पर क्‍या कहते, गांधी

इन दिनों देशभर के किसान संसद द्वारा पारित तीन कानूनों को लेकर बेचैन हैं। इन कानूनों के विरोध में जगह-जगह धरना, प्रदर्शन जारी हैं और इनकी मार्फत सरकार से कहा जा रहा है कि वह इन कानूनों को वापस ले…

विश्व सामाजिक मंच की पुनर्कल्पना मुमकिन है, असंभव नहीं!

क्या दुबारा से एक नए विश्व मंच की कोशिश जरूरी है? क्योंकि जितने सवाल पहले थे वे आज भी हैं। जब दुनिया के आंदोलन मौजूदा हालात में अपनी राजनैतिक ज़मीन बचाने में लगे हैं, वैसे में एक अति ऊर्जा और…

जेपी का इस्तेमाल छोड़ें, उन्हें समझने की कोशिश करें

जेपी की संपूर्ण क्रांति के मूल में स्वतंत्रता समता और बंधुत्व की ही अवधारणा है। उन्होंने उसे भारतीय संदर्भ और अपने अंतरराष्ट्रीय अनुभवों से नया रूप दिया था। वे अपनी नैतिकता में हमारी पतित होती राजनीतिक व्यवस्था का शुद्धीकरण करना…

लोकतंत्र की लुटिया डूबने, न डूबने देने का चुनाव

कोविड-19 महामारी तक को अनदेखा करके मार्च में करीब दो दर्जन विधायकों को ‘लोकतंत्र की रक्षा करने’ की खातिर अपने अल्‍पमत के पाले में मिलाने वाली ‘भारतीय जनता पार्टी’ और बहुमत गंवाकर गद्दी से उतारी जाने वाली ‘भारतीय राष्‍ट्रीय कांग्रेस,’…