पूंजी और राज्य की आधुनिक अवधारणा एक अर्थ में हिंसक अवधारणा साबित हुई है। उसने एक तरफ, अमीरी-गरीबी के बीच गहरी, अश्लील खाई पैदा की है और दूसरी तरफ, राज्य को जरूरत से ज्यादा शक्ति-सम्पन्न बनाया है। आज यदि महात्मा…
आजकल किसानों और किसानी से जुडे लोगों के बीच भारी बेचैनी दिखाई दे रही है। हाल में केन्द्र सरकार द्वारा संसद में पारित करवाए गए तीन कानूनों को लेकर देशभर में धरना, प्रदर्शन, चक्काजाम और रैलियां जारी हैं। क्या किसानी…