उत्तराखंड

उत्तराखंड नागरिक समाज द्वारा प्रदेश में साम्प्रदायिक तत्वों पर लगाम लगाने की अपील

देहरादून। उत्तराखंड में कुछ तत्वों द्वारा माहौल को जो साम्प्रदायिक रंग देकर सामाजिक समरसता और सद्भाव बिगाड़ी जा रही है उसको लेकर उत्तराखंड के आम नागरिकों, सामाजिक कार्यकर्ताओं, सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधियों, पत्रकारों, वकीलों, पूर्व सरकारी अधिकारियों, राजनैतिक दलों के…

उत्तराखंड : संवेदनहीनता की चिंताजनक मिसालें

जोशीमठ में जमीन के लगातार धंसने को लेकर ‘इसरो’ की रिपोर्ट के आंकड़ों से संवेदनहीनता पुष्ट हुई। ‘इसरो’ के मुताबिक 22 दिसम्बर 2022 और 8 जनवरी 2023 के बीच जोशीमठ में भू-धंसाव 5.4 सेन्टीमीटर हुआ था, जबकि इसके पहले के…

नहीं रहे प्रसिद्ध पर्यावरणविद् विमल भाई, आज दिल्ली एम्स में ली अंतिम सांस

विमल भाई के निधन से हिमालय की एक आवाज गुम हो गई दिल्‍ली, 15 अगस्‍त। प्रसिद्ध समाजसेवी, पर्यावरण विद, नदियों को बचाने के लिए जीवन भर संघर्ष करने वाले जुझारू नेता, राष्ट्रीय जनआंदोलनों के संगठन (एनएपीएम) के राष्ट्रीय समन्वयक विमल…

उत्तराखंड: रामगढ़ फलपट्टी के किसान गांधीवादी तरीके से आंदोलन के मूड में

अपने सीमित संसाधनों से अपनी खेती बागबानी बचाने वाले बहुत छोटे- छोटे किसान महिलाएं अपेक्षित सरकारी सहायता न मिलने और नीतिगत मामले में घोर लापरवाही के कारण नीति नियंताओं से बेहद नाराज़ हैं। उनका मानना है कि वे अपनी मांगों…

उत्तराखंड विधानसभा चुनाव 2022: 24 लाख वनवासियों के सम्मानपूर्वक जीवन, विकास और पर्यावरण के लिए वनाधिकार कानून लागू हो

वन पंचायत संघर्ष मोर्चा की मतदाताओं, प्रत्याशियों और राजनीतिक दलों से अपील जल, जंगल, जमीन पर स्थानीय समाज के हकों के सवाल ने उत्तराखंड राज्य को जन्म दिया था, परंतु इतने संघर्षों के पश्चात राज्य में यह हक निरंतर घटते…

बांधों से बेहाल हिमालय

साठ के दशक में ‘नए भारत के तीर्थ’ माने गए बड़े बांध आजकल किस तरह की त्रासदी रच रहे हैं, इसे देखना-समझना हो तो केवल उत्तराखंड की यात्रा काफी होगी। गंगा और उसकी अनेक सहायक नदियों पर जल-विद्युत, सिंचाई और…

‘विकास’ की बलि चढ़ता हिमालय

उत्तराखंड की ताजा त्रासदी ने एक बार फिर उस सनातन सवाल को उछाल दिया है कि आखिर विकास के नाम पर होने वाली गतिविधियां हमारे विनाश की वजह क्यों बनती जा रहीं हैं? क्या उत्तराखंड में बनी और बन रहीं…

चमोली त्रासदी की इंसानी वजहें

सीखने-सिखाने के मामले में हमारा ‘ट्रैक-रिकॉर्ड’ कोई उत्साहवर्धक नहीं रहा है। मसलन – उत्तराखंड में हाल में आई भीषण आपदा से क्या हम कुछ सीखेंगे? क्या पहले भी कभी कुछ सीखा गया है, ताकि भविष्य में ऐसी आपदाएं नहीं हों…

उत्पादक के हाथ में उत्पादन के साधन देने से गरीबी दूर होगी

विनोबा भावे की 125 जयंती पर विनोबा विचार प्रवाह अंतर्राष्ट्रीय संगीति में सुश्री राधा बहन 30 अगस्त। विनोबा जी भूदान से अहिंसा को और अधिक आध्यात्मिक बनाया। वे उत्पादक को उत्पादन के साधन उसके हाथों मे देने की शुरुआत थी,…