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भगवद्गीता असांप्रदायिक ग्रंथ है

12 अगस्‍त को विनोबा विचार प्रवाह की अंतर्राष्ट्रीय संगीति में विदुषी उषा बहन श्रीमद्भवद्गीता असांप्रदायिक ग्रंथ है। इस ग्रंथ में कहीं पर भी विचारों का आक्रमण नहीं किया गया है। यह ग्रंथ भारत ही नहीं दुनिया के चिंतकों में लोकप्रिय…

संत विनोबा इस देश के समन्वयाचार्य हैं: सुश्री ज्योत्सना बहन

विनोबा भावे की 125वीं जयंती पर विनोबा विचार प्रवाह की अंतर्राष्ट्रीय संगीति भारत को एक करने का श्रेय यहां के संतों को है। उन्होंने पूरे देश में घूमकर सद्विचारों में इसे बांध दिया है। भारत में अखंड आध्यात्मिक विचार संपदा…

धर्म और राजनीति के स्थान पर अध्यात्म और विज्ञान को स्थापित करना समय की मांग

विनोबा विचार प्रवाह में  पवनार आश्रम की सुश्री कालिंदी बहन ने कहा आज विज्ञान से मनुष्य समाज भयभीत है। विज्ञान आक्रमण कर रहा है। दूसरी ओर राजनीतिक चिंतन संकुचितता को बढ़ावा दे रहा है। इसमें सांप्रदायिकता भी अपना योगदान दे…

जयजगत में निहित है विश्व शांति का संदेश

आचार्य विनोबा भावे की 125 जयंती वर्ष पर‘विनोबा विचार प्रवाह’ में पी.वी.राजगोपाल का व्‍याख्यान 8 अगस्त। शाहजहांपुरदेश में संतों की भूमिका को आचार्य विनोबा भावे  ने जिस ढंग से रखा वह अनुकरणीय है। उनके जीवन में कर्म, ज्ञान और भक्ति…

घुमक्कड़ी का आनन्द

आजकल हमारे रोजमर्रा के जीवन में सुबह की सैर एक जरूरी क्रिया हो गई है, लेकिन क्‍या इसी घुमक्‍कडी को जीवन के व्‍यापक आनंद और ज्ञानार्जन में तब्‍दील किया जा सकता है ? संत विनोबा और आदि शंकराचार्य ने इसी…

एनजीओ की बढती अप्रासंगिकता

‘सेवा,’ ‘विकास,’ ‘राजनीतिक प्रशिक्षण’ और ‘गैर-दलीय राजनीति’ के इन विभिन्‍न सोपानों से गुजरे और मौजूदा भेडियाधसान में ‘एनजीओ’ पुकारे जाने वाले इन व्‍यक्तियों, समूहों के बीच समझ, तेवर और उद्देश्‍यों को लेकर गहरी भिन्‍नता रही है। अव्‍वल तो, परिभाषा से…

जमीन पैसे की नहीं, प्राण की चीज

आचार्य विनोबा मानव के लिए सबसे खतरनाक चीज अगर कोई है तो वह है, उसकी जमीन से उखड़ना। जैसे हर एक पेड़ का मूल जमीन में होता है, वैसे ही हर एक मनुष्य का संबंध जमीन के साथ होना चाहिए।…

लोकसत्ता कहीं गहरा अन्याय कर बैठे तो सत्याग्रह ही रास्ता है

11 सितंबर : विनोबा जयंती पर विशेष आज साम्प्रदायिक विद्वेष और उससे उत्पन्न हिंसा देश की सर्वाधिक गंभीर समस्या है। मंदिर-मस्जिद विवाद या ऐसे अन्य मसलों से साम्प्रदायिकता पैदा नहीं होती बल्कि साम्प्रदायिक भावना के कारण ये मसले पैदा होते…

आचार्य विनोबा भावे : सच्चे अर्थ में लोकशाही कहीं नहीं है

11 सितंबर : विनोबा जयंती पर विशेष हर महापुरूष का सोचने-विचारने और चिंतन का अपने निराला ढंग होता है। अपने चिंतन का जो नवनीत अपने जीवनकाल में वे समय-समय पर समाज का परोसते हैं-वह समाज-जीवन में चल रहे व्यवहार के…