social reform

ज्योतिबा फुले की प्रासंगिकता : एक समकालीन विश्लेषण

उन्नीसवीं शताब्दी के सामाजिक अंधकार में जाति, लिंग और शिक्षा के प्रश्नों पर सबसे तेज स्वर उठाने वालों में महात्मा ज्योतिराव फुले का नाम अग्रणी है। रूढ़ियों और अन्याय के विरुद्ध उनके जमीनी संघर्ष ने भारतीय समाज में परिवर्तन की…

गांधी दर्शन और विचार शख्सियत

आचार्य विनोबा भावे: अहिंसा, सेवा और सामाजिक न्याय की शाश्वत दृष्टि

भारतीय स्वतंत्रता संग्राम और सामाजिक सुधार के इतिहास में आचार्य विनोबा भावे का व्यक्तित्व अद्वितीय और प्रेरक रहा है। गांधीजी के आध्यात्मिक उत्तराधिकारी माने जाने वाले विनोबा ने अहिंसा, सेवा और आत्मनिर्भरता को जीवन का आधार बनाया। भूदान आंदोलन, सर्वोदय…

‘बदलो बिहार अभियान’ के तहत सामाजिक न्याय और विकास पर चर्चा

विकास के सतत और समावेशी मॉडल पर जोर : तुषार गांधी समेत नामी कार्यकर्ता शामिल हाजीपुर, 31 अक्टूबर। बिहार के हाजीपुर में आज सामाजिक न्याय, राज्य के विकास और जनता के बुनियादी मुद्दों पर एक महत्वपूर्ण चर्चा का आयोजन किया…

गांधी अध्‍येता, शांति की रचनाकार, समाज की साधिका : निर्मला देशपांडे

निर्मला देशपांडे—एक साधारण सी दिखने वाली असाधारण स्त्री, जिन्होंने खादी पहनकर हिंसा की आग में भी शांति के फूल बोए। भूदान से लेकर कश्मीर और गुजरात तक, वे जहां गईं, करुणा, संवाद और समर्पण की मिसाल बन गईं। उनकी जयंती…

डॉ. आंबेडकर का धम्मचक्र प्रवर्तन — समानता और न्याय का नया अध्याय

डॉ. आंबेडकर ने 14 अक्टूबर 1956 को नागपुर की दीक्षाभूमि में बौद्ध धर्म ग्रहण कर सम्राट अशोक की धम्म परंपरा को पुनर्जीवित किया। यह ऐतिहासिक क्षण भारतीय समाज में समता, नैतिकता और मानवता के नए अध्याय की शुरुआत थी। उनके…

ओडिशा : सौ साल पहले ओडिशा में महात्मा गांधी

ब्रिटिश हुकूमत के खिलाफ संघर्ष के साथ-साथ समाज सुधार और आत्मनिर्भरता की अलख जगाने वाले महात्मा गांधी का ओड़िशा प्रवास स्वतंत्रता आंदोलन का ऐतिहासिक अध्याय बन गया। 1921 और 1925 में कटक में हुए उनके प्रवास ने खादी, चरखे और…

विधवाओं के भीतर साहस भरने की जरूरत : मध्‍यप्रदेश में किया विधवा प्रथा उन्मूलन का सूत्रपात

मध्य प्रदेश के इंदौर शहर में महिला जागृति अभियान की पांचवी वर्षगांठ पर वरिष्ठ साहित्यकार अरुणा खरगोनकर द्वारा संपादित विधवाओं की दशा पर केंद्रित एक अभूतपूर्व स्मारिका का लोकार्पण किया गया, जो नई सदी में विधवाओं से संबंधित मुद्दों पर…

आचार्य विनोबा भावे : आश्रम जीवन से सर्वोदय की ओर

राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के आध्यात्मिक उत्तराधिकारी आचार्य विनोबा भावे स्वतंत्रता संग्राम के प्रथम सत्याग्रही, भूदान-ग्रामदान आंदोलन के प्रवर्तक और ग्रामस्वराज के सशक्त प्रवक्ता रहे। महाराष्ट्र के गगोडा गाँव में जन्मे विनोबा ने शिक्षा, महिला सशक्तिकरण, दलित उत्थान और सामाजिक सुधार…

आजादी पर्व : क्‍या बोल के लब आजाद है तेरे?

भारतीय स्वतंत्रता संग्राम से लेकर आज तक महिलाओं ने साहस, त्याग और नेतृत्व से देश का गौरव बढ़ाया है। रानी लक्ष्मीबाई, सावित्रीबाई फुले, सरोजिनी नायडू से लेकर निर्मला सीतारमण और पीवी सिंधु तक, स्त्रियों ने हर क्षेत्र में अपनी छाप…