सामाजिक कार्यकर्ता मेधा पाटकर का गांव चिखल्दा में अनिश्चितकालीन अनशन का दूसरा दिन भोपाल, 16 जून। मध्यप्रदेश के आदिवासी बहुल धार जिले सहित कुछ अन्य जिलों में सरदार सरोवर परियोजना से प्रभावित लोगों को अब तक पूरी तरह न्याय नहीं…
करीब आधी सदी में पूंजी और इंसानों के ढेरों संसाधन लगाकर पश्चिमी मध्यप्रदेश में ‘सरदार सरोवर जल-विद्युत परियोजना’ खडी तो कर ली गई है, गाहे-बगाहे उसके गुणगान भी किए जाते हैं, लेकिन उसकी चपेट में आई ढाई सौ गांवों की…
बड़े बांधों के घोषित उद्देश्यों में जल-विद्युत और सिंचाई के बलावा बाढ़-नियंत्रण भी शामिल है, लेकिन देशभर में कहीं बांधों से बाढ़ को नियंत्रित करने का कोई ठोस उदाहरण सामने नहीं आया है। मध्यप्रदेश में जहां नर्मदा और उसकी सहायक…
पिछले तीन दशकों की बरसात में शायद ही कोई साल रहा हो जब ‘सरदार सरोवर’ प्रभावितों ने अपने जीने-मरने के कानूनी हकों के लिए संघर्ष न किया हो। पिछले साल आंदोलन की मुखिया मेधा पाटकर के आमरण अनशन के बाद…
नर्मदा बचाओ आंदोलन के 35 बरस ‘सरदार सरोवर’ के प्रभावितों-विस्थापितों को पैंतीस साल पहले पुनर्वास के जो रंगीन सपने दिखाए गए थे, ठीक उसी तर्ज पर चालीस-पैंतालीस साल पहले तवा के विस्थापितों को भी ललचाया गया था। विस्थापन के नाम…
नर्मदा पर बने ‘सरदार सरोवर’ बांध के विस्थापितों को बरसों बाद अपने हक में कुछ सकारात्मक होता दिखाई दिया है। पिछली केन्द्र और राज्य सरकारों के ‘शून्य’ विस्थापन-पुनर्वास मानने के बरक्स मध्यप्रदेश की नई सरकार ने विस्थापितों की उनके गांवों…