rural livelihoods

ग्रामीण आजीविका : बकरी के महत्त्व को कम मत आंकिए

महात्मा गांधी की प्रिय बकरी की हैसियत जानना हो तो किसी भी आदिवासी समाज में चले जाइए। वहां बकरी न सिर्फ दुधारू जानवर, बल्कि लगभग बेंक का दर्जा रखती है। वक्त-बेवक्त जरूरत पड़ने पर बकरी बेचकर लोग अपना काम चला…

अध्‍ययन : आमदनी में पारंपरिक खेती से आगे नहीं प्राकृतिक खेती, न ही आहार विविधता में दिलाती है खास बढ़त

देश में रासायनिक और प्राकृतिक खेती के बीच जारी बहस को एक नए अध्ययन ने नया मोड़ दिया है। रामकृष्ण मिशन विवेकानंद एजुकेशनल एंड रिसर्च इंस्टीट्यूट द्वारा किए गए अध्ययन में पाया गया कि प्राकृतिक खेती न तो आय में…