Ram Manohar Lohia

नए विश्व संकट में पुराने विचारों का नया अर्थ : गांधी, जयप्रकाश और लोहिया की प्रासंगिकता

गांधी, जेपी और लोहिया केवल अतीत के नाम नहीं, भविष्य की दिशा हैं। जब दुनिया हथियारों और बाजारों के जाल में उलझी है, तब उनके समाजवाद, आत्मनिर्भरता और नैतिक राजनीति के विचार फिर जीवित हो रहे हैं। यह समय उन्हें…

विश्व संसद की कल्पना भारत के प्राचीन सिद्धांत व संस्कृति को नया आयाम दे सकती है

रघु ठाकुर 23 मार्च डॉक्टर राम मनोहर लोहिया का जन्म दिवस है । डॉक्टर लोहिया का सारा जीवन संघर्षों का और मौलिक विचारों को देने का इतिहास है। जर्मनी से पढ़कर आने के बाद वे महात्मा गांधी की अगुवाई में…

राममय लोक मानस

इन दिनों समूचा देश अयोध्या में राम मंदिर के लोकार्पण के चलते राममय दिखाई दे रहा है, लेकिन क्या हमारे मनीषी अपने राम को इसी तरह मानते थे? क्या थीं, उनकी धारणाएं? प्रस्तुत है, इसी विषय पर अनिल त्रिवेदी की…

अंदरूनी अत्याचारियों से विद्रोह चाहते थे लोहिया

लोहिया की विद्रोही चेतना अपने ढंग की अनोखी है। वह इतिहास की जरूरी बहसों को बढ़ाती है और व्यर्थ की बहसों को शांत करते हुए उसमें सामंजस्य बिठा देती है। डा. लोहिया अगर भगत सिंह और गांधी के बीच सेतु…