Pranab Sen

आँकड़ों की चमक के पीछे छिपी सच्चाई : क्या हम सच से मुँह मोड़ रहे हैं?

भारतीय मध्यवर्ग आज मिथ्या गौरव और भय के मिश्रण से गढ़े आंकड़ों के सहारे एक वैकल्पिक यथार्थ रच रहा है। अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं और अर्थशास्त्रियों को अविश्वसनीय ठहराकर वह ऐसी चमकीली तस्वीर चाहता है जिसमें तेज़ विकास, बढ़ता ख़तरा और एक…