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महेंद्र भाई : मूल्यों की विरासत और सर्वोदय की पत्रकारिता

महेंद्रभाई की 23वीं पुण्यतिथि एक ऐसे सार्वजनिक जीवन को याद करने का अवसर है, जिसमें सादगी, सेवा और नैतिक दृढ़ता केंद्रीय मूल्य रहे। सर्वोदय प्रेस सर्विस के माध्यम से उन्होंने पत्रकारिता को सत्ता के समीप नहीं, समाज के पक्ष में…

भूदान से जयजगत तक : विनोबा भावे की प्रासंगिक विरासत

11 सितंबर को आचार्य विनोबा भावे की 130वीं जयंती पर हम उस महापुरुष को स्मरण करते हैं, जिसने सत्य, अहिंसा और सेवा को जीवन का मूलमंत्र बनाया। “जय जगत” का उनका संदेश विश्वबंधुत्व, न्याय और समता पर आधारित था। भूदान…

विनोबा जयंती : सरकार नियामत नहीं बरसाती

विनोबा भावे की जयंती हमें याद दिलाती है कि सत्ता की राजनीति से ऊपर उठकर सेवा ही जीवन का सच्चा उद्देश्य है। उनका विचार था कि गांव का भला गांव के लोगों के हाथ में है, न कि केवल सरकार…

डाकू आत्‍म समर्पण के 50 बरस : चंबल में अहिंसा के प्रयोग

चंबल घाटी की दस्यु समस्या के समाधान के लिए जो काम सरकारें सदियों से नहीं कर पाई वह कार्य सर्वोदय कार्यकर्ता करने में सफल रहे। मैत्री से ही मिटे बैर को बाबा विनोबा तथा लोकनायक जयप्रकाश नारायण के नेतृत्व में…