विकास के नाम पर होने वाले विनाश में जल, जंगल और जमीन के साथ अब पहाडों का नाम भी जुड़ गया है। पहाड़ के विनाश में उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश सीधे निशाने पर हैं। मनुष्य अपने जीवन की अंतहीन आवश्यकताओं…
दीवाली खुशियों और उजालों का त्योहार है, पर जब यही रोशनी धुएं और शोर में बदल जाए, तो उसका अर्थ खो जाता है। अत्यधिक पटाखों ने इस पर्व की पवित्रता और सादगी को प्रदूषण के धुंए में ढक दिया है।…
संविधान ने पर्यावरण को खासी अहमियत दी है, लेकिन उसे अमल में नहीं लाया जाता या आधे-अधूरे मन से लाया जाता है। संविधान में पर्यावरण को लेकर किये गए प्रावधान इस विषय की ओर संवेदनशीलता दर्शाते हैं। संविधान के ऐसे…
खेलों की तरह हमारे यहां अब त्यौहारों को भी बाजार के हवाले किया जा रहा है। आपसी मेल-मिलाप, आनंद और स्वाद के आधार पर मनाए जाने वाले त्यौहार अब मुहूर्त निकालकर की जाने वाली खरीददारी को अहमियत देने लगे हैं।…