NGO

NGO : समाज के लिए सेवक

सत्ता और उसके विपक्ष की राजनीतिक जमातों के अलावा समाज में एक और धारा रही है जिसे ‘गैर-सरकारी संगठन’ (NGO) या स्वयंसेवी संगठन कहा जाता है। ये समूह या संगठन समाज में राहत, सेवा, संगठन, शिक्षण और विकास के काम…

फिसलन की राह पर गैर-सरकारी संस्थाएं

एक जमाने में मिशन माना जाने वाला सामाजिक कार्य आजकल एक व्यवसाय का दर्जा हासिल कर चुका है। ऐसे में जाहिर है, व्यवसाय की रीति-नीति भी सामाजिक कार्यों का हिस्सा बनती हैं। क्या होते हैं, इस बदलाव के नतीजे? आज…

स्वयंसेवी कार्यकर्ताओं को जमीनी एवं व्यावहारिक सच्‍चाईयों के साथ काम करना चाहिए – पद्मश्री डॉ. जनक पलटा मगिलिगन

भोपाल, 29 सितंबर। स्वयंसेवी संस्थाओं की नेटवर्किंग एवं कार्यकर्ताओं के दक्षता विकास में संलग्‍न एनजीओ पाठशाला ने अपने द्वितीय स्‍थापना दिवस के मौके पर 28 सितम्बर को समर्थन संस्था परिसर, भोपाल में अंतरराष्‍ट्रीय ख्याति प्राप्‍त वरिष्‍ठ सामााजिक कार्यकर्त्‍ता पद्मश्री डॉ….

देशभर के संसाधनों का इस्तेमाल कोरोना महामारी को नियंत्रित करने में किया जाये

विकल्प संगम मंच से जुड़े देशभर के 65 संगठनों ने जारी किया संयुक्‍त बयान सप्रेसमीडिया.इन। सामाजिक एवं पारिस्थिकीय रूप से समता आधारित बेहतर और वैकल्पिक तरीकों पर काम करने वाले संस्‍थाओं के मंच विकल्प संगम ने कोराना महामारी को नियंत्रित करने…

सरकार की साथी, गैर-सरकारी संस्‍थाएं

गैर-सरकारी समाजसेवी संस्‍थाएं सरकार से समान दूरी रखते हुए उसे आइना दिखाते रहने के लिए भी खडी की जाती रही हैं, लेकिन आजकल इन संस्‍थाओं का चाल-चरित्र और चेहरा बदल-सा गया है। ‘एनजीओ’ के नाम से पुकारी जाने वाली ये…

राजनीति से रुसवाई के स्वयंसेवी पडाव

राजनीति से रुसवाई की एक और कमजोरी अपने समाज को कम-से-कम जानने के रूप में उभरती है। यह जानना दिलचस्प हो सकता है कि अधिकांश ‘एनजीओ’ अपने आसपास रहने, गुजर-बसर करने वाले समाज को न्यूनतम जानते हैं। समाज-कार्य में लगे…

एनजीओ की बढती अप्रासंगिकता

‘सेवा,’ ‘विकास,’ ‘राजनीतिक प्रशिक्षण’ और ‘गैर-दलीय राजनीति’ के इन विभिन्‍न सोपानों से गुजरे और मौजूदा भेडियाधसान में ‘एनजीओ’ पुकारे जाने वाले इन व्‍यक्तियों, समूहों के बीच समझ, तेवर और उद्देश्‍यों को लेकर गहरी भिन्‍नता रही है। अव्‍वल तो, परिभाषा से…

लोकतंत्र में लौटते मजदूर

जिस लोकतंत्र की कसमें खाकर हम अपने तमाम अच्‍छे-बुरे, निजी-सार्वजनिक काम निकालते रहते हैं और किसी दूसरी राजनीतिक जमात के सत्‍ता पर सवारी गांठने से जिस लोकतंत्र की हत्‍या होना मान लिया जाता है, ठीक उसी लोकतंत्र की एन नाक…