डॉ. आंबेडकर ने 14 अक्टूबर 1956 को नागपुर की दीक्षाभूमि में बौद्ध धर्म ग्रहण कर सम्राट अशोक की धम्म परंपरा को पुनर्जीवित किया। यह ऐतिहासिक क्षण भारतीय समाज में समता, नैतिकता और मानवता के नए अध्याय की शुरुआत थी। उनके…
ओडिशा हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश रह चुके और रिटायरमेंट के बाद बतौर वकील सक्रिय न्यायमूर्ति एस. मुरलीधर ने 7 सितंबर को दिल्ली के ‘इंडिया इस्लामिक कल्चरल सेंटर’ में एक महत्वपूर्ण व्याख्यान दिया। यहां इसके संपादित अंश दिए गए हैं।) अमन…
11 सितंबर को आचार्य विनोबा भावे की 130वीं जयंती पर हम उस महापुरुष को स्मरण करते हैं, जिसने सत्य, अहिंसा और सेवा को जीवन का मूलमंत्र बनाया। “जय जगत” का उनका संदेश विश्वबंधुत्व, न्याय और समता पर आधारित था। भूदान…
न्यायपालिका लोकतंत्र का तीसरा सबसे अहम् स्तम्भ है| सर्वोच्च न्यायालय के कई फैसलों के बावजूद आये दिन निचली अदालतों में वकीलों की हड़तालें जारी हैं| वकील हडताल पर जाकर स्वयं उसी सर्वोच्च न्यायालय के खिलाफ जाते रहते हैं जो न्याय…
न्यायाधीश को सिर्फ निष्पक्ष और स्वतंत्र होना ही नहीं चाहिए, बल्कि दिखना भी चाहिए। इसी के बाद वह शब्द हमें ज्यादा सुनाई देने लगा, जिसे अंग्रेजी में Recuse कहते हैं। जब न्यायाधीश या कमेटी का कोई सदस्य अपने स्वविवेक से…