हाल में घोषित झारखंड विधानसभा चुनावों की 13 और 20 नवंबर की तारीखों ने अब तक कछुआ चाल से ठुमक रहे ‘पेसा कानून’ को फिर से हवा दे दी है। करीब तीन दशक पहले संसद में पारित आदिवासियों के लिए…
झारखंड के मधुपुर इलाके में बरसों से गैर-दलीय राजनीतिक-सामाजिक कार्य में लगे घनश्याम ने हाल में अपने करीब आधी सदी के अनुभवों पर एक किताब लिखी है। जाहिर है, इसमें तरह-तरह के खट्टे-मीठे अनुभवों, विपरीत परिस्थितियों के साथ-साथ कठिन समय…
किसानों, आदिवासियों और खेती से जुडे अनेक लोगों के लिए आजकल विकास का मतलब उनके प्राकृतिक संसाधनों, खासकर जमीन की लूट हो गया है। आदिवासी राज्य झारखंड भी इससे अछूता नहीं है। झारखंड के एक इलाके में जमीन की मारामार…