दिवाली रोशनी का नहीं, संवेदनाओं का भी त्योहार है — वह जो भीतर के अंधकार को मिटा सके। आज जब कृत्रिम उजालों में रिश्तों की ऊष्मा खोती जा रही है, जरूरत है कि हम अपने भीतर करुणा, प्रेम और अपनापन…
आवाज संस्था द्वारा शहर के पांच समाजसेवियों को ‘आवाज़ अवार्ड’ से नवाज़ा गया इंदौर, 6 अप्रैल। मिलावट सिर्फ खाने-पीने की चीज़ों में नहीं, बल्कि हमारे विचारों और व्यवहार में भी हो गई है। जब इंसान के अंदर की ईमानदारी कमजोर…
उन्नीसवीं और बीसवीं सदी में जिस अवधारणा ने राष्ट्रों के एकीकरण के साथ-साथ सर्वाधिक युद्धों की पृष्ठभूमि तैयार की है, वह राष्ट्रवाद ही है। क्या है, यह राष्ट्रवाद? इस अवधारण ने कैसे सत्ताओं को प्रभावित और सक्रिय किया है? पिछले…