Gandhian Philosophy

Sarva Seva Sangh Land issue : सिविल कोर्ट के फैसले पर टिकी है नजरें, अदालत का फैसला जो भी आएगा, हमें स्वीकार

शुक्रवार से शुरू होगा जुल्म की निशानी पुस्तकों का वितरण वाराणसी, 28 जुलाई । आचार्य विनोबा भावे, जयप्रकाश नारायण द्वारा स्‍थापित सर्व सेवा संघ के जमीन स्‍वामित्‍व को लेकर शुक्रवार 28 जुलाई को सिविल कोर्ट में होने वाली सुनवाई पर…

Sarva Seva Sangh : इतिहास बन जाएगी विनोबा और बापू की संस्था

सरकारी क्रूरता की गाथा कहेगी वाराणसी के राजघाट स्थित सर्व सेवा संघ के भवनों के ध्वस्तीकरण को लेकर प्रशासन और सर्व सेवा संघ के बीच काफी समय से खींचतान चल रही है। संघ से जुड़े लोगों ने धरना-प्रदर्शन के जरिये…

रामनगरी ओरछा : अविरल बहती बापू की विचारधारा

प्रतिभा चतुर्वेदी पुण्यभूमि राम नगरी भगवान राम के कारण जानी जाती है तो वही उसी धरती पर प्रवाहित पवित्र नदी बेतवा के कंचन-घाट को बापू के अस्थि-विसर्जन के लिए भी जाना जाता है। 12 फरवरी सन 1948 को गांधीजी की अस्थियों का विसर्जन देश के विभिन्न…

वर्ष 2023 का निवानो शांति पुरस्कार प्रख्यात गांधीवादी राजगोपाल पी.व्ही. को दिये जाने की घोषणा

टोक्यो में 11 मई 2023 को दिया जायेगा पुरस्‍कार प्रख्यात गांधीवादी, सर्वोदयी नेता एवं एकता परिषद के संस्थापक और श्री राजगोपाल पी.व्ही. को न्याय और शांति की सेवा में उनके असाधारण कार्य के लिए दुनिया की प्रतिष्ठित संस्था निवानों पीस…

गांधी विचार के प्रकाश स्तंभ थे – पी. गोपीनाथन नायर

पी. गोपीनाथन नायर के निधन पर गांधी संस्‍थाओं ने दी भावभीनी श्रद्धांजलि तिरुवनंतपुरम । गांधीवादी विचारक, स्वतंत्रता सेनानी और पद्मश्री से सम्मानित गांधी शांति प्रतिष्ठान के आजीवन सदस्य कार्यकर्ताओं के अंतिम स्तम्भ, सर्वोदय परिवार के वरिष्ठ साथी, स्वतंत्रता सेनानी, भूदान…

पंचायती राज में गांधी की प्रासंगिकता

गांधी के नजरिए से मौजूदा लोकतंत्र की समीक्षा की जाए तो उसमें राज्य की सबसे छोटी प्रशासनिक इकाई ग्रामसभाएं और ग्राम-पंचायतें प्रमुखता से उभरती हैं, लेकिन धीरे-धीरे हमारे लोकतंत्र की बुराईयां गांव और उनके प्रशासनिक ताने-बाने तक पहुंच गई हैं।…

मौजूदा राजनीति से असहमत गांधी

स्वराज के लिए गांधीजी राजनीतिक आजादी के साथ-साथ सामाजिक, नैतिक और आर्थिक आजादी आवश्यक मानते थे। लोकशाही की स्थापना के लिए सैनिक सत्ता पर नागरिक सत्ता की प्रधानता की लड़ाई वे अनिवार्य मानते थे। दरअसल आज सत्ता का आधार दंड…