Gandhian Philosophy

हे राम, साकार गांधी निराकार गांधी !

30 जनवरी 1948 की संध्या, बिड़ला भवन में प्रार्थना के लिए बढ़ते महात्मा गांधी “हे राम” के अंतिम शब्दों के साथ साकार से निराकार में विलीन हो गए। उनका महाप्रयाण केवल एक देह का अंत नहीं था, बल्कि सत्य, अहिंसा…

काका साहेब कालेकर : विचार, साहित्य और सामाजिक न्याय के गांधीयुग पथप्रदर्शक

भारतीय स्वतंत्रता संग्राम, साहित्य और सामाजिक सुधार के प्रमुख स्तंभ काका साहेब कालेकर न केवल गांधीजी के निकटतम सहयोगी थे, बल्कि भाषा, शिक्षा, नैतिकता और सामाजिक न्याय के प्रखर विचारक भी रहे। शिक्षक, साहित्यकार, पत्रकार और स्वतंत्रता सेनानी के रूप…

मानव जीवन विकास समिति की रजत जयंती : गांधीवादी विचारों के साथ ग्रामीण विकास का उत्सव

कटनी, 29 नवंबर। मानव जीवन विकास समिति (MJVS) ने अपनी स्थापना के 25 वर्ष पूर्ण होने पर रजत जयंती समारोह का आयोजन शहर में किया। कार्यक्रम की अध्यक्षता प्रसिद्ध गांधीवादी विचारक श्री राजगोपाल पी. व्ही. ने की। इस अवसर पर…

धीरेन्द्र मजूमदार : समग्र ग्राम सेवा के शास्त्री, मिस्त्री और लोक-यात्रा के महायात्री

धीरेन्द्र मजूमदार भारतीय रचनात्मक आंदोलन के उन तेजस्वी व्यक्तित्वों में थे, जिनमें विचार की पारदर्शिता और कर्म की प्रतिबद्धता अद्भुत सामंजस्य के साथ प्रवाहित होती थी। धीरेन्द्रदा के नाम से पहचाने जाने वाले इस गांधीवादी कार्यकर्ता ने साधना, सेवा और…

गांधी स्मारक निधि के राष्ट्रीय युवा शिविर में युवाओं ने लिया शांति, प्रेम और सेवा का संकल्प

कौसानी में संपन्न हुआ राष्ट्रीय गांधी विचार युवा शिविर कौसानी, 16 अक्‍टूबर। केंद्रीय गांधी स्मारक निधि  द्वारा 12 से 15 अक्टूबर तक उत्तराखंड के अनासक्ति आश्रम, कौसानी में आयोजित राष्ट्रीय गांधी विचार युवा एवं विश्वविद्यालय शिविर सफलता पूर्वक संपन्न हुआ।…

कटुताओं और विभाजनों के इस दौर में महात्‍मा गांधी ही हैं हमारी एकमात्र उम्मीद

इंदौर में सेवा सुरभि द्वारा आयोजित गांधी जयंती व्याख्यान में राहुल देव का उद्बोधन इंदौर, 28 सितम्बर। “आज  के हर मोहल्ले और हर शहर में दस-दस, पचास-पचास गांधी चाहिए। जब तक गांधी की राह पर चलने वाले लोग सामने नहीं…

National Panchayati Raj Day : सशक्त पंचायतों से ही बनेगा विकसित राष्ट्र

भारत गांवों का देश है, जहां पंचायती राज प्रणाली लोकतंत्र की जड़ें मजबूत करती है। यह प्रणाली स्थानीय स्वशासन, महिलाओं की भागीदारी और समावेशी विकास का माध्यम है। परंतु आज भी ग्राम पंचायतें अधिकारों के प्रयोग और महिला प्रतिनिधियों की…

‘गांधी की महिला फौज’ : एक रोचक किताब

2 अक्‍टूबर : गांधी जयंती पर विशेष महिला-आरक्षण की मौजूदा बहसा-बहसी के बीचम-बीच अरविन्द मोहन की ‘गांधी की महिला फौज’ किताब हमें एक ऐसे नायाब अनुभव से रू-ब-रू करवाती है जिसमें बिना किसी तामझाम के गांधी ने अपनी पलटन में…

देश- दुनिया महात्‍मा गांधी को कहां छोड़ कर आ गई है, आखिर उन्‍हें कहां ढूंढे?

गांधी जयंती की पूर्व बेला पर वरिष्‍ठ पत्रकार श्रवण गर्ग का व्‍याख्‍यान इंदौर, 1 अक्टूबर। हम महसूस ही नहीं कर पा रहे है कि समाज बेसुध क्‍यों हो रहा है? इसकी जुबान क्‍यों लडखड़ा रही है। इस दौर में देश-…

सर्व सेवा संघ भवन ध्‍वस्‍तीकरण : गाँधी, विनोबा और जयप्रकाश की विरासत को किया जमींदोज

अनैतिक और अलोकतांत्रिक ढंग से गांधी विचारक के ऐतिहासिक स्थल का विध्वंस वाराणसी, 12 अगस्‍त। सर्व सेवा संघ परिसर,राजघाट को आज सुबह स्थानीय प्रशासन तथा रेलवे की जुगलबंदी से ध्वस्त करने की कार्यवाही शुरू हुई। यहां सर्व सेवा संघ परिसर…