हम हर दीपावली पर राम की प्रतीक्षा करते हैं, पर अपनी अयोध्या में लौटने का साहस नहीं जुटा पाते। असली दीपावली तब होगी जब हम अपने भीतर के वनवास से लौटें, भय से नहीं, विश्वास से दीया जलाएँ — ताकि…
दिवाली रोशनी का नहीं, संवेदनाओं का भी त्योहार है — वह जो भीतर के अंधकार को मिटा सके। आज जब कृत्रिम उजालों में रिश्तों की ऊष्मा खोती जा रही है, जरूरत है कि हम अपने भीतर करुणा, प्रेम और अपनापन…