स्वच्छता का सिरमौर कहलाने वाला, विकास और समृद्धि की चमक में डूबा इंदौर आज एक भयावह विडंबना से गुजर रहा है। जहाँ मेट्रो, फ़्लाईओवर और करोड़ों के समारोह हैं, वहीं लोग दूषित पानी पीने को मजबूर हैं। भागीरथपुरा की त्रासदी…
प्रकृति से बढ़ती दूरी अब केवल भावनात्मक संकट नहीं, बल्कि मानव अस्तित्व का प्रश्न बन चुकी है। ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय के अध्ययन के अनुसार, प्रकृति से अलगाव पर्यावरणीय विनाश का मूल कारण है। औद्योगिकीकरण और शहरीकरण ने विकास तो दिया, पर…
ब्राज़ील के बेलेम में आयोजित कॉप-30 जलवायु सम्मेलन का उद्देश्य उष्णकटिबंधीय वनों की रक्षा बताता है, पर विडंबना यह है कि इसी क्षेत्र में प्रतिदिन लगभग 50 हजार पेड़ काटे जा रहे हैं। सम्मेलन में आने वाले नेताओं और विशेषज्ञों…
महात्मा गांधी ने हिंद स्वराज में जिस ‘सभ्यता’ को हालात कहा था, वही आज के जलवायु संकट की जड़ बन चुकी है। बापू ने सौ साल पहले चेतावनी दी थी कि अगर दुनिया यूरोप-अमेरिका के उपभोगवादी रास्ते पर चली, तो…
भोपाल, 13 जून। हसदेव अरण्य बचाओ आंदोलन ने देशभर में पर्यावरण संरक्षण को लेकर युवाओं और नागरिक समाज में नई चेतना और सक्रियता पैदा की है। अब केरल से लेकर जम्मू तक युवा पर्यावरण के सवालों पर एकजुट होकर आवाज़…
दिल्ली में इन दिनों एक प्रकार से सांसों का आपातकाल सा दिखाई दे रहा है, जहां चारों ओर स्मॉग की चादर छाई दिखती है। स्मॉग की यह चादर कितनी खतरनाक है, इसका अनुमान इसी से लगाया जा सकता है कि…