पिछले महीने गठित देश की ताजा-तरीन 18वीं लोकसभा क्या सचमुच हमारे लोकतंत्र की संरक्षक हो पाएगी? उसके उद्घाटन-सत्र में ही जिस तरह के कारनामे हुए, क्या वे लोकतंत्र में भरोसा करने वाले नागरिकों की अपेक्षाओं पर खरे उतरते दिखते हैं?…
हाल के पांच राज्यों के चुनाव परिणाम देश की दोनों पार्टियों – भाजपा, कांग्रेस के तौर-तरीकों को भी उजागर करते हैं। ये बताते हैं कि इन पार्टियों ने किन तरीकों से अपनी-अपनी चुनावी समर लडी है। क्या हैं, इन दोनों…
साल के आख़िर में 230 सीटों वाली विधानसभा के लिए होने वाले चुनावों में प्रदेश की साढ़े आठ करोड़ जनता के लिए यही तय करना बचा है कि किस पार्टी का हिंदुत्व उसे ज़्यादा उजला दिखाई देता है! कर्नाटक में…
देश-हित में राहुल की यात्रा का योगदान यह माना जा सकता है कि नागरिक सत्तारूढ़ दल और उसके आनुषंगिक संगठनों के उग्रवादी कार्यकर्ताओं से कम डरने लगेंगे। गौर किया जा सकता है कि सांप्रदायिक विद्वेष की घटनाओं में कमी दिखाई…
हमारे समय में ऐसे कई महानायक हुए हैं जिन्होंने इतिहास की धारा को बदलने के प्रयास किए हैं। ऐसे ही एक व्यक्ति लोकनायक जयप्रकाश नारायण रहे हैं जिनकी अगुआई में देश में तानाशाही की पहली कोशिश को सफलतापूर्वक रोका गया…
इस बात की उम्मीद करना कि कांग्रेस के मौजूदा संकट का कोई सर्व सम्मत हल अगले छह महीनों में निकल आएगा कोरोना के अंतिम निदान की खोज करने जैसा है। कोरोना के ताजा मामले उन मरीज़ों के हैं जो दो-चार…
कांग्रेस के लिए बहुत ही नाज़ुक वक्त में एक और सरकार स्वाहा होने से बच गई पर राजस्थान की सात करोड़ जनता और देश के लिए अब कुछ ही बचे हुए नेताओं में से भी कुछ और नज़रों से गिर…
जब देश को ही सरकार से कुछ जानने की ज़रूरत नहीं पड़ी है तो फिर राहुल गांधी अकेले को चीनी हस्तक्षेप और पीएम कैयर्स फंड आदि की जानकारी को लेकर अपना करियर और कांग्रेस का भविष्य दांव पर क्यों लगाना…
देश एक ऐसी व्यवस्था की तरफ़ बढ़ रहा है जिसमें सब कुछ ऑटो मोड पर होगा। धीरे-धीरे चुनी हुई सरकारों की ज़रूरत ही ख़त्म हो जाएगी।।जनता की जान की क़ीमत घटती जाएगी और ग़ुलामों की तरह बिकने को तैयार जन…
इसे अतिरंजित प्रचार माना जा सकता है कि सचिन की समस्या केवल गेहलोत को ही लेकर है। उनकी समस्या शायद राहुल गांधी को लेकर ज़्यादा बड़ी है। राहुल का कम्फ़र्ट लेवल या तो अपनी टीम के उन युवा साथियों के…