‘संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम’ (यूएनईपी) के द्वारा किए गए शोध के अनुसार जलवायु परिवर्तन के कारण विस्थापित होने वाले 80 प्रतिशत महिलाएँ या बच्चे हैं। इनमें किशोरी और युवा लड़कियां भी शामिल हैं जो कि गरीबी, हिंसा या अनपेक्षित गर्भधारण, असमय गर्भपात के बढ़ते जोखिम का सामना कर रही…
प्रख्यात पर्यावरणविद और वैज्ञानिक सौम्या दत्ता का व्याख्यान भोपाल। क्लाइमेट जस्टिस मुहिम, भोपाल द्वारा आयोजित “जलवायु न्याय, नीतियाँ और हाशिए के समुदाय” विषय पर परिचर्चा एकता परिषद कार्यालय, गांधी भवन भोपाल में आयोजित हुई। इसमें प्रख्यात पर्यावरणविद और वैज्ञानिक, पूर्व…
सब जानते हैं कि जलवायु परिवर्तन की मौजूदा त्रासदी की वजह धरती पर बसे इंसानों की हवस पर आधारित जीवन-पद्धति है, लेकिन कोई इसे रोकना, बदलना नहीं चाहता। वैश्विक स्तर पर भी ठीक यही हालत है और तरह-तरह के जमावडों…
सत्तर के दशक से जोर पकड़ते पर्यावरण-प्रदूषण ने अब ऐसे ‘जलवायु परिवर्तन’ climate change तक की यात्रा पूरी कर ली है जिसमें माताएं बच्चों को जन्म तक देने से बचना चाहती हैं। उनका कहना है कि प्राकृतिक संसाधनों के अंधाधुंध…
धरती को गर्म करने के मामले में मीथेन भी कार्बन डाईऑक्साइड से कुछ कम नहीं है। मीथेन पृथ्वी के बढ़ते तापमान में एक तिहाई वृद्धि के लिए ज़िम्मेदार है। वर्ष 2006 लेकर अब तक मीथेन उत्सर्जन में 7 प्रतिशत वृद्धि…
बरसात के मौसम में आकाशीय बिजली का गिरना यूं तो एक आम बात है, लेकिन उसकी वजह जानना चाहें तो पता चलता है कि यह हमारे मौजूदा कथित विकास का ही एक और नतीजा है। विकास की मार्फत लगातार उत्सर्जित…
अध्ययन का अनुमान है कि नए वायरस के संचरण की संभावना सबसे अधिक तब होगी जब बढ़ते तापमान के कारण जीवों का प्रवास ठंडे क्षेत्रों की ओर होगा और वे स्थानीय जीवों के संपर्क में आएंगे। यह संभावना ऊंचाई वाले…
उत्तरी भारत के तमाम हिस्सों में फ़िलहाल लगभग हर कोई इस वक़्त एक जानलेवा ताप लहरों (हीटवेव) का अनुभव कर रहा है। सिर्फ भारत ही नहीं बल्कि भारत समेत पाकिस्तान में भी जानलेवा हीटवेव तैयार हो रही है। ये वो इलाका है जहां दुनिया के हर पांच में…
मौजूदा विकास के साथ जो संकट सर्वाधिक महसूस किया जा रहा है, वह है-जलवायु परिवर्तन का। जिस तौर-तरीके से हम अपना विकास करने में लगे हैं उससे धीरे-धीरे पहले प्रकृति, फिर वनस्पतियां और फिर खेती समाप्त होती जाएंगी। आम लोगों…
संयुक्त राष्ट्र के प्रमुख ने बुधवार 23 मार्च को एक ऐसी परियोजना की घोषणा की, जिसमें पृथ्वी पर मौजूद प्रत्येक व्यक्ति के लिए अगले पांच साल में मौसम-चेतावनी प्रणाली (अर्लि वेदर वार्निंग सिस्टम) तक पहुँच सुनिश्चित की जाएगी। ऐसा करना अब इसलिए…