Civil society

स्‍मृति शेष / एक और जगदीप !

जगदीप छोकर अब नहीं रहे। एडीआर के संस्थापक और लोकतंत्र में चुनावी सुधार के लिए समर्पित इस जुनूनी व्यक्ति की विदाई केवल एक इंसान की नहीं, बल्कि एक विचार और संघर्ष की भी विदाई है। छोकर ने साबित किया कि…

आज के दौर में लोकतंत्र की आत्मा को ज़िंदा रखने की चुनौती : गांधी विचारक कुमार प्रशांत

भोपाल में ‘गांधी का लोकतंत्र’ विषय पर व्याख्यान भोपाल, 22 अप्रैल। “लोकतंत्र को केवल चुनाव और बहुमत तक सीमित कर देना, उसे आत्मा-विहीन बना देना है। यह जीवन की ऐसी शैली है, जो सत्य, सह-अस्तित्व, संवाद और असहमति को सम्मान…

उत्तराखंड नागरिक समाज द्वारा प्रदेश में साम्प्रदायिक तत्वों पर लगाम लगाने की अपील

देहरादून। उत्तराखंड में कुछ तत्वों द्वारा माहौल को जो साम्प्रदायिक रंग देकर सामाजिक समरसता और सद्भाव बिगाड़ी जा रही है उसको लेकर उत्तराखंड के आम नागरिकों, सामाजिक कार्यकर्ताओं, सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधियों, पत्रकारों, वकीलों, पूर्व सरकारी अधिकारियों, राजनैतिक दलों के…

‘23 की हिंसा ‘24 में कितना बड़ा रिकॉर्ड क़ायम करेगी ?

फ़िल्मों में प्रदर्शित की जानी वाली अतिरंजित हिंसा और सड़कों पर व्यक्त होने वाली असली सांप्रदायिक हिंसा से फ़िल्म उद्योग, सेंसर बोर्ड,राजनीति, धर्म और समाज किसी को कोई परेशानी नहीं है। सत्ताधीशों के लिए जिस तरह से धर्म पैंतीस पार…

हमारे देश में लोकतंत्र Democracy नागरिकों के कारण बचा है और नागरिकों के कारण ही बचेगा

अभ्यास मंडल की 62 वीं ग्रीष्मकालीन व्याख्यानमाला में सांसद मनीष तिवारी का व्‍याख्‍यान इंदौर, 17 मई। सांसद एवं कांग्रेस के प्रवक्ता मनीष तिवारी ने कहा है कि लोकतंत्र Democracy की रक्षा के लिए संवैधानिक संस्थाओं को चुनौतियों से बचाना नागरिकों…

हैसियत खोती ‘सिविल सोसायटी’

‘सिविल सोसाइटी’ के बढ़ते ‘संस्थानीकरण’ के दौर में काम को ‘सुव्यवस्थित’ रूप से करने का चलन बढ़ा है। इसका अर्थ यह है कि ‘सिविल सोसाइटी’ अब एक सुरक्षित माहौल में काम करना चाहती है, पर दबे-कुचलों की आवाज़ उठाना सुरक्षित…

लोकतंत्र में लौटते मजदूर

जिस लोकतंत्र की कसमें खाकर हम अपने तमाम अच्‍छे-बुरे, निजी-सार्वजनिक काम निकालते रहते हैं और किसी दूसरी राजनीतिक जमात के सत्‍ता पर सवारी गांठने से जिस लोकतंत्र की हत्‍या होना मान लिया जाता है, ठीक उसी लोकतंत्र की एन नाक…