अहिंसा, सामाजिक न्याय और सौहार्द की समकालीन प्रासंगिकता पर हुई चर्चा

फ्रंटियर गांधी की विरासत पर राष्ट्रीय सेमिनार

बेंगलुरु, 6 मार्च। एचकेबीकेए डिग्री कॉलेज में भारत रत्न खान अब्दुल गफ्फार खान (फ्रंटियर गांधी) पर एक राष्ट्रीय सेमिनार आयोजित किया गया। सेमिनार का मुख्य विषय था “फ्रंटियर गांधी की विरासत: अहिंसा, सामाजिक न्याय और सौहार्द की समकालीन प्रासंगिकता”।

सेमिनार में प्रमुख अतिथि और विशिष्टजनों में बी.आर. पाटिल, उपाध्यक्ष, कर्नाटक राज्य नीति एवं योजना आयोग, बी.टी. ललिता नायक, कर्नाटक साहित्य अकादमी पुरस्कार प्राप्तकर्ता, आर. रोशन बैग, पूर्व मंत्री, कर्नाटक, इनामुल हसन, खुदाई खिदमतगार नेता एवं महासचिव, आरजीपीआरएस, आर. कलीमुल्लाह, शांति कार्यकर्ता, बेंगलुरु, मंसूर चेटलू, सामाजिक कार्यकर्ता, कॉलेज प्राचार्य डॉ. हरिश्चंद्र एस. बी., बीबीए विभागाध्यक्ष डॉ. मधु, बीसीए विभागाध्यक्ष डॉ. जोसफाइन प्रपुल्ला तथा बीकॉम विभागाध्यक्ष मोहम्मद खिजरुल्ला उपस्थित रहे।

राजमोहन गांधी का ऑनलाइन संबोधन

मुख्य वक्ता के रूप में प्रसिद्ध इतिहासकार और लेखक राजमोहन गांधी ने ऑनलाइन संबोधन किया। उन्होंने महात्मा गांधी और खान अब्दुल गफ्फार खान के बीच गहरे वैचारिक और व्यक्तिगत संबंधों पर प्रकाश डाला।

उन्होंने दोनों नेताओं के अहिंसक संघर्षों को रेखांकित करते हुए कहा कि आज के समय में जब हिंसा की घटनाएं बढ़ रही हैं और हिंदू-मुस्लिम समुदायों के बीच विभाजन गहराता दिखाई देता है, तब फ्रंटियर गांधी के विचारों पर गंभीर चिंतन की आवश्यकता और अधिक बढ़ जाती है। उन्होंने एचकेबीके कॉलेज और खुदाई खिदमतगार संगठन द्वारा आयोजित इस राष्ट्रीय सेमिनार की सराहना की।

एकता और अहिंसा के संदेश पर जोर

मुख्य अतिथि बी.आर. पाटिल ने महात्मा गांधी और फ्रंटियर गांधी के संघर्षों का उल्लेख करते हुए कहा कि इन महान व्यक्तित्वों का संदेश भारत की “एकता में विविधता” की परंपरा को मजबूत करता है। उन्होंने कहा कि आज के दौर में उनके विचारों की प्रासंगिकता और अधिक बढ़ गई है।

बी.टी. ललिता नायक ने अहिंसा के सिद्धांत को विस्तार से समझाते हुए इसे भारतीय संस्कृति का मूल तत्व बताया। उन्होंने महात्मा गांधी और फ्रंटियर गांधी के वैचारिक सामंजस्य पर प्रकाश डाला और कहा कि अहिंसा आज भी समाज को दिशा देने वाली शक्ति है।

बढ़ती हिंसा पर चिंता

पूर्व मंत्री आर. रोशन बैग ने समाज में बढ़ती हिंसा पर चिंता व्यक्त करते हुए महात्मा गांधी, मौलाना अबुल कलाम आजाद और जयप्रकाश नारायण जैसे नेताओं के अहिंसक संघर्षों को याद किया। उन्होंने सुझाव दिया कि बेंगलुरु में विभिन्न गैर-सरकारी संगठनों को साथ लाकर इस तरह के सेमिनार बड़े पैमाने पर आयोजित किए जाने चाहिए ताकि अधिक लोगों तक इन विचारों का संदेश पहुंच सके।

भाईचारे के संदेश का उदाहरण

खुदाई खिदमतगार नेता इनामुल हसन ने खान अब्दुल गफ्फार खान के जीवन और विचारों पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि अहिंसा और भाईचारे का मार्ग आज भी समाज के लिए सबसे प्रासंगिक है।

उन्होंने जनवरी 2026 के अंत में उत्तराखंड के कोटद्वार में घटी एक घटना का उल्लेख करते हुए बताया कि वहां जिम ट्रेनर दीपक ने भारी दबाव के बावजूद एक बुजुर्ग मुस्लिम दुकानदार की मदद की। उन्होंने इसे सामाजिक सौहार्द और मानवीय मूल्यों का जीवंत उदाहरण बताया।

फोटो प्रदर्शनी बनी आकर्षण का केंद्र

सेमिनार के दौरान छात्रों के लिए फ्रंटियर गांधी के जीवन, स्वतंत्रता संग्राम और अहिंसा के विभिन्न पहलुओं को दर्शाती एक फोटो प्रदर्शनी भी लगाई गई। यह प्रदर्शनी छात्रों के बीच विशेष आकर्षण का केंद्र रही।

देश के विभिन्न राज्यों से आए प्रतिभागियों ने चर्चा में भाग लेते हुए सीमांत गांधी और महात्मा गांधी के प्रति अपनी श्रद्धा और सम्मान व्यक्त किया।

दीप प्रज्ज्वलन और सांस्कृतिक प्रस्तुति से शुरुआत

कार्यक्रम की शुरुआत दीप प्रज्ज्वलन से हुई। इसके बाद कॉलेज के छात्र अभिमन्यु ने मधुर स्वर में प्रसिद्ध भजन “वैष्णव जन तो तेने कहिए” प्रस्तुत किया। इसके पश्चात महात्मा गांधी और फ्रंटियर गांधी के चित्रों पर माल्यार्पण किया गया।

कार्यक्रम का स्वागत भाषण कॉलेज प्राचार्य डॉ. हरिश्चंद्र एस. बी. ने दिया। सेमिनार का संयोजन डॉ. विवेक कुमार साव और डॉ. लीलू कुमारी ने किया, जबकि प्रो. पवन ने धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत किया। सेमिनार में बड़ी संख्या में छात्रों और शिक्षकों ने सक्रिय भागीदारी की।

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