समाज

हस्तशिल्प : कोविड की चपेट में ‘बाघ-प्रिन्ट’

कोविड-19 बीमारी के असर में, दूसरे तमाम छोटे-मध्‍यम-लघु उद्योगों की तरह मध्यप्रदेश के धार जिले के ‘बाघ-प्रिन्ट्स’ के कारीगर भी संकटों का सामना कर रहे हैं। पिछले दो सालों में कपडों पर की जाने वाली इस विश्व-विख्यात छापा कला की…

बराबरी के विरोध में मर्दानगी

हजारों साल की भारतीय संस्कृति का सतत गुणगान करने वाले हमारे समाज में औरतें आज भी दोयम दर्जे पर विराजमान हैं। मर्दों की मर्दानगी को कुछ ऐसी हैसियत प्राप्त है कि वह जब चाहे, जैसे चाहे औरतों के साथ कर…

समाज : गरीबी उन्मूलन से समाज में शांति

गरीबी और शांति के बीच गहरा और एक-दूसरे पर निर्भरता का द्वंद्वात्मक रिश्ता रहा है। यानि यदि किसी समाज में गरीबी होगी तो वहां शांति स्थापना असंभव है। पडौसी बांग्लादेश में करीब चालीस साल पहले इसे एक प्रोफेसर ने महसूस…

आजादी के 75 साल बाद भी जल, जंगल, जमीन का प्रश्‍न नहीं हो सका हल : राजगोपाल

भारत सहित लंदन, मैक्सिको, सेनेगल, फिलीपींस एवं 25 अन्‍य देशों में चल रही है न्याय और शान्ति पदयात्रा 28 सितम्बर, 2021 दिल्ली। एक तरफ जहां हम भारत की 75वीं आजादी वर्षगाँठ का जश्न मना रहे हैं वहीं दूसरी तरफ आज…

गांधी के रास्ते पर चलने के लिए सेवाग्राम में जुटे देशभर के युवा

सेवाग्राम, वर्धा। गांधी आश्रम परिसर, सेवाग्राम के यात्री निवास में देश के 16 राज्यों के 160 युवक-युवती इकट्ठा हुए हैं। सर्व सेवा संघ के युवा सेल द्वारा 20 से 24 सितंबर 2021 तक आयोजित इस तालीम- शिविर में शामिल सहभागी…

शख्सियत / सिंधुताई सपकाल : ‘हजार बच्चों की मां’

सिंधु ताई ने अपना जीवन अनाथ बच्चों और बेसहारा महिलाओं के लिए समर्पित कर दिया है। आज सैकड़ों अनाथ बच्चों वाले उनके परिवार में 250 दामाद हैं और 50 बहुएं हैं। एक हजार से ज्यादा पोते और पोतियां हैं। 350…

संकट में सफाई कामगारों की सेहत

सभी के जानते-बूझते समाज का एक तबका मानवीय गंदगी को ढोने, साफ करने के ऐसे काम में आज भी लगा है जिसे किसी हालत में मानवीय नहीं कहा जा सकता, लेकिन सत्ता, समाज और सरकारें उसकी तरफ इस कदर मुंह…

क्‍या नए पारिस्थितिक संतुलन की कल्पना नए सामाजिक बदलाव के साथ संभव है ?

हमारे जीवनकाल में ही हमारे सामने आये नैरेटिव नष्ट हो जाते हैं। आज हमारे बीच हज़ारों सालों पुराने, सैकड़ों सालों पुराने, दसियों सालों पुराने और कुछ सालों पुराने सारे युद्ध एक साथ छिड़ गए हैं। धर्म, जाति, नस्ल, रंग, लिंग,…

जाओ इससे अच्छे-अच्छे काम करते जाना, तालाब बनाते जाना

विश्‍व जल दिवस पर विशेष कूड़न, बुढ़ान, सरमन और कौंराई थे चार भाई। चारों सुबह जल्दी उठकर अपने खेत पर काम करने जाते। दोपहर को कूड़न की बेटी आती, पोटली में खाना लेकर। ⁠एक दिन घर से खेत जाते समय…

कोरोना-काल में सेक्स वर्कर्स

कोरोना काल में देश के 14 करोड़ से ज्यादा परिवारों की रोजी-रोटी पर असर पड़ा है। इनमें समाज के हाशिये पर रहने वाले समुदायों की आजीविका सबसे ज्यादा प्रभावित हुई है। इन्हीं में सेक्स वर्कर्स समुदाय भी शामिल है। प्रस्‍तुत…