संरक्षित जंगलों में असुरक्षित आदिवासी
पिछले कुछ सालों से आदिवासियों, वन-निवासियों की एकजुटता, संघर्ष और लगातार बढ़ती ताकत के चलते उनके हित में अनेक कानून बने हैं, सरकारें भी उन्हें संरक्षण देने की घोषणाएं करती रहती हैं, लेकिन क्या सचमुच इन प्रयासों से आदिवासियों का…
स्वाधीनता याने आत्मा की स्वाधीनता
जयप्रकाश नारायण 9 अगस्त को अगस्त क्रांति दिवस स्वाधीनता मेरे लिए कई अर्थ रखती है । पर सबसे अधिक मेरे लिए यह आत्मा की स्वाधीनता का अर्थ रखती है, विचारों की स्वाधीनता का और तब कहीं जाकर कर्म की स्वाधीनता…
चुनावी राजनीति : मत विभाजन का रूकना 2024 में महत्वपूर्ण निर्णायक मुद्दा है!
भारतीय चुनाव सीधे-सीधे केवल अंक गणित की तरह नहीं होता है। भारतीय चुनाव में एक पक्षीय चुनाव परिणाम भी आते रहें हैं तो खण्डित जनादेश भी आये हैं। आजादी आन्दोलन के बाद स्वाधीनता मिलने पर शुरुआती दौर में भारतीय राजनीति…
कौन देगा साफ हवा-पानी की ग्यारंटी !
मौजूदा आम चुनावों में सभी राजनीतिक दल अपनी-अपनी ओर से नागरिकों को थोक में तरह-तरह की ग्यारंटी दे रहे हैं, लेकिन किसी का ध्यान जीवन की बुनियादी जरूरत, हवा और पानी की ग्यारंटी की तरफ नहीं है। क्या इन दोनों…
क्या इन्दौर लोकसभा चुनाव में नोटा राजनैतिक प्रतिरोध का प्रतीक बनेगा?
भारत के आम चुनावों में भारतीय मतदाता को केवल अपना मनपसंद जनप्रतिनिधि निर्वाचित करने का ही अधिकार नहीं है भारत के प्रत्येक मतदाता को निर्वाचन में प्रत्याशियों को नापसंद करने का भी संवैधानिक अधिकार प्राप्त है। भारतीय मतदाता की सामान्य…
गलतियों का हिमालय : जनता को तो अहसास होना ही चाहिए
आजादी की लड़ाई की शुरुआत की बात है। गांधीजी ने ‘असहयोग आंदोलन’ का आह्वान किया था। वैसी देशव्यापी हड़ताल इतिहास में कभी देखी नहीं गई थी ! लगने लगा था कि अंग्रेजों के पांव उखड़ जाएंगे, लेकिन तभी गांधीजी ने अचानक पूरा आंदोलन…
बंद होती बातचीत
नंदिता मिश्र आज हम जिस दुनिया में जी रहे हैं उसमें संचार और सम्पर्क के साधनों की कोई कमी नहीं है। जितना व्यक्तिगत सम्पर्क इस समय हो रहा है, इतना पहले कभी नहीं हुआ होगा। मोबाईल ने तो हमारी दुनिया ही…
साहित्य : अंधायुग और कविता की पुकार
चंद्रकांत देवताले समाज के सुख दुख को अपने साहित्य में स्थान देने वाले यशस्वी कवि चंद्रकांत देवताले ने मूल रूप से हिंदी कविता में बदलाव के पक्षधर रहे हैं। साहित्यकार देवताले अपने समय और भविष्य के कवि थे। वे सच…
भारत में घुमंतूजन जातियों को संवैधानिक संरक्षण देने की पहल
भारत में घुमंतू, अर्ध-घुमंतू और गैर-अधिसूचित जनजातियों के संरक्षण और भविष्य की योजनाओँ पर विचार विमर्श की प्रक्रिया चल रही है। गैर-अधिसूचित जनजातियों, घुमंतू जनजातियों और अर्ध-घुमंतू जनजातियों को भी गरिमा पूर्ण जीवन जीने का अधिकार है। ऐसे समुदायों के…
शिक्षा : ‘एड-टेक’ की उठा-पटक !
शिक्षा,खासकर बुनियादी शिक्षा समाज और सरकार की नजरों में लगातार गैर-जरूरी होती जा रही है। इस बदहाली का लाभ उठाने के लिए अनेक निजी कंपनियां खडी हो रही हैं जिनका एकमात्र उद्देश्य भरपूर मुनाफा कूटना होता है। ऐसे में विद्यार्थियों…









