स्थायी स्तम्भ

किसान आंदोलन : एक बार फिर बकासुर

वैसे देखा जाए तो बकासुर की यह कथा विज्ञान और तकनीक पर न्यौछावर विद्वानों से लेकर अहर्निश भक्तिभाव में डूबे धर्म-प्राणों तक सभी में कमोबेश मौजूद रहती है। सभी को लगता है कि संकट या समस्या का एकमात्र इलाज केवल…

लोकतंत्र में किसान

‘तटस्‍थ लोकतंत्री’ की नजर से देखा जाए तो एक तरफ वह सरकार दिखाई देती है जिसने दो कानून और एक संशोधन लाने के लिए किसी तरह की कोई लोकतांत्रिक औपचारिकता नहीं बरती। ना तो किसान संगठनों, उनके प्रतिनिधियों से कोई…

विकास की ‘बकासुरी’ नीतियों से निपटता किसान

पिछले बडे आंदोलनों को देखें तो दिल्‍ली का मौजूदा आंदोलन कई मायनों में भिन्‍न दिखाई देगा। तरह-तरह से उकसावे के बावजूद अपने अहिंसक स्‍वरूप, जाति-धर्म-वर्ग के हमारे अंतर्निहित विभाजन से परे, सामूहिक नेतृत्‍व और युवाओं-बुजुर्गों, महिलाओं-पुरुषों आदि को यथायोग्‍य जिम्‍मेदारी…

नागरिकों को ही ‘विपक्ष’ का विपक्षी बनाया जा रहा है !

सरकार ने अब अपने किसान संगठन भी खड़े कर लिए हैं। मतलब कुछ किसान अब दूसरे किसानों से अलग होंगे ! जैसे कि इस समय देश में अलग-अलग नागरिक तैयार किए जा रहे हैं। धर्म को परास्त करने के लिए…

किसान आंदोलन : जानने-सीखने लायक कुछ बातें!

देश की राजधानी की सीमाओं पर बैठे किसानों में यह विभाजन दिखाई नहीं पड़ता, लेकिन आखिर यह एक ‘आपातकाल’ भर है। बिना किसी बहस-मुबाहिसे के पहले अध्‍यादेश जारी करके और फिर संसद के दोनों सदनों में पारित करवाकर लाए गए…

आपदाओं को अवसर में पलटने में माहिर हैं मोदी !

किसान आंदोलन प्रधानमंत्री और उनकी सरकार से अधिक अब विपक्षी दलों की संयुक्त ताक़त और जनता के उस वर्ग के लिए चुनौती बन गया है जो कृषि क़ानूनों की समाप्ति को सत्ता के गलियारों में प्रजातांत्रिक मूल्यों की वापसी के…

खेती का खाका बदलने का मौका

किसान और किसानी की इस बदहाली में नीति-निर्माताओं और सत्‍ताधारियों की उन मान्‍यताओं ने और रंग चढाया जिनके मुताबिक किसानों की बदहाली कम उत्‍पादन, बाजारों से दूरी और कृषि-क्षेत्र पर अधिक दबाव के कारण हो रही है। नतीजे में सरकारी…

क्या ‘जंतर मंतर‘ बन पाएगा नया शाहीन बाग़ ?

किसान आंदोलन से निकलने वाले परिणामों को देश के चश्मे से यूँ देखे जाने की ज़रूरत है कि उनकी माँगों के साथ किसी भी तरह के समझौते का होना अथवा न होना देश में नागरिक-हितों को लेकर प्रजातांत्रिक शिकायतों के…

खेती से खेलती सरकार

सत्‍ता और सरकारों के कर्ज-माफी सरीखे टोटकों को किसानों की नजर से देखें तो लगातार बढती किसान आत्‍महत्‍याएं दिखाई देती हैं। जाहिर है, किसानों और राज्‍य व केन्‍द्र की सरकारों के बीच गहरी संवादहीनता है। ऐसी संवादहीनता जिसमें सरकार की…

सौमित्र चटर्जी के बहाने

सौमित्र चटर्जी इसीलिए आदमकद कलाकार और बेहतरीन इंसान थे क्‍योंकि उनका अभिनय और जीवन, दोनों अपने समय, समाज और उसकी राजनीति से गहरे जुड़ा हुआ था। एक बड़े लेखक, संपादक, कवि, नाटककार और देश के तीसरे सर्वोच्‍च सम्‍मान ‘पद्मभूषण’ से…