– विनीत तिवारी अब्बास ख्वाजा अहमद साहब की प्रतिभा का एक बड़ा क्षेत्र उनकी पत्रकारिता भी थी। “ब्लिट्ज” में छपने वाला उनका स्तम्भ “लास्ट पेज” इतना लोकप्रिय था कि अनेक पाठक अखबार को आख़िरी पन्ने से पढ़ना शुरू करते थे।…
एनआईए कोर्ट ने असम सरकार को तगड़ा झटका देते हुए विधायक अखिल गोगोई (Akhil Gogoi) को सभी आरोपों से बरी कर दिया है। दिसंबर 2019 में नागरिकता संशोधन अधिनियम (सीएए) के खिलाफ हुए हिंसक प्रदर्शनों में कथित भूमिका के लिए…
जिस तरह एशिया भीषण बदलावों से गुज़र रहा है, साईनाथ ‘चेतना’ के नए स्रोत तलाश रहे हैं और नागरिक सहयोग को बढ़ावा दे रहे हैं। इसी वजह से, वह प्रतिष्ठित फ़ुकुओका पुरस्कार के असली हक़दार हैं। वरिष्ठ पत्रकार और पीपुल्स…
12 जून। गांधीवादी विचारक, पर्यावरण के सजग प्रहरी, पद्मश्री गोविंदन कुट्टी मेनन कर देह आज पंच तत्व में विलीन हो गई । शनिवार की दोपहर में रीजन पार्क मुक्तिधाम में अंतिम संस्कर किया गया। चिता को मुखाग्नि उनके बेटे गोपाल…
12 जून । प्रसिध्द पर्यावरणविद एवं गांधी विचारक टी. जी. कुट्टी मेनन का आज सुबह 7.40 मिनट पर इंदौर में निधन हो गया। वे 81 वर्ष के थे। शुक्रवार सुबह उन्हें हार्ट अटैक आया था। जिसके बाद उन्हें इलाज के…
अपने जीने के लिए जरूरी पर्यावरण के साथ हम एक व्यक्ति, समाज और सत्ता की तरह जैसा क्रूर, आत्महंता व्यवहार कर रहे हैं, वह एक सीमा के बाद हमें खुद ही भोगना पडेगा। विकास के झांसे में की जा रही…
वे तरह तरह के खनिजों से बने व्यक्ति थे. अपने होने की कुछ मिश्र धातुयें उन्होंने खुद बनाई थीं. जैसे प्रकृति प्रेम, पर्यावरण बेचैनी, उपभोग की अति की निरर्थकता उन्हें ‘मठी मार्क्सवादियों’ से अलग करती है. इसलिये उनकी मुख्य रुचि…
स्मृति लेख पिछले दिनों हम सबसे सदा के लिए विदा हुए श्री सुन्दरलाल बहुगुणा को श्रद्धांजलि-स्वरूप लेख। पहली बार मेरी मुलाकात उनसे वर्ष 1979 में हुई। उस समय युवा समूह के रूप में पर्यावरण के मुद्दों पर हमारी यात्रा की…
स्वतंत्रता सेनानी और समाजसेवी एचएस डोरेस्वामी का 104 साल की उम्र में निधन। हाल में ही कोरोना को दी थी मात। डोरेस्वामी कभी किसी राजनीतिक पद पर नहीं रहे हैं, लेकिन उन्होंने अपना जीवन लोगों की सेवा में लगा दिया।…
दुनियाभर को चिपको आंदोलन के जरिये पर्यावरण संरक्षण का अनूठा संदेश देने वाले हिमालय रक्षक कहे जाने वाले सुंदरलाल बहुगुणा हाल ही में दुनिया से बिदा हो गए। महात्मा गांधी के विचारों को आत्मसात करके बहुगुणाजी ने प्रकृति, पेड़, पहाड़…