योगेश कुमार गोयल

भाषा नहीं, भारत की पहचान का वैश्विक विस्तार है हिन्दी

हिन्दी दिवस केवल उत्सव नहीं, बल्कि हमारी सांस्कृतिक जड़ों और राष्ट्रीय एकता का प्रतीक है। यह दिन हमें मातृभाषा की गरिमा और वैश्विक महत्व को समझने का अवसर देता है। हिन्दी की सरलता, सौंदर्य और विविधता इसे विश्व मंच पर…

मानसिक स्वास्थ्य की अनदेखी से बढ़ती आत्महत्या की त्रासदी

विश्व स्वास्थ्य संगठन और इंटरनेशनल एसोसिएशन फॉर सुसाइड प्रिवेंशन की पहल पर प्रतिवर्ष 10 सितम्बर को ‘विश्व आत्महत्या रोकथाम दिवस’ मनाया जाता है। आत्महत्या जैसे गंभीर मसले पर जागरूकता बढ़ाने और संवाद को प्रोत्साहित करने के लिए इस वर्ष की…

धरती के दिग्गज का संकट : हाथियों की घटती दुनिया

धरती के सबसे बड़े जमीनी जीव हाथी, जो बुद्धिमान और सामाजिक स्वभाव के लिए जाने जाते हैं, आज अस्तित्व के संकट में हैं। आवास विनाश, मानव-हाथी संघर्ष, अवैध शिकार और कैद में दुर्व्यवहार ने उनकी संख्या को तेजी से घटाया…

World Biofuel Day : मानव जीवन के सुनहरे भविष्य की निधि बन सकता है जैव ईंधन

जलवायु परिवर्तन और पारंपरिक जीवाश्म ईंधन पर अत्यधिक निर्भरता के कारण बढ़ते पर्यावरणीय संकट के बीच जैव ईंधन एक टिकाऊ और स्वच्छ विकल्प के रूप में उभर रहा है। 10 अगस्त को मनाया जाने वाला विश्व जैव ईंधन दिवस ग्रीनहाउस…

हिरोशिमा की राख से उठते सवाल

6 अगस्त 1945 को हिरोशिमा पर परमाणु बम गिराकर मानवता ने विज्ञान के सबसे क्रूर प्रयोग का साक्षी बनाया। यह सिर्फ एक शहर की तबाही नहीं, बल्कि चेतना, करुणा और सहअस्तित्व की अवधारणा पर गहरा घाव था। ‘हिरोशिमा दिवस’ आज…

एक क्लिक में समूची दुनिया से जुड़ने की क्रांति है WWW

1 अगस्त को मनाया जाने वाला ‘वर्ल्ड वाइड वेब दिवस’ उस तकनीकी क्रांति को स्मरण करने का अवसर है, जिसने दुनिया को एक डिजिटल मंच पर जोड़ दिया। टिम बर्नर्स-ली द्वारा विकसित WWW ने ज्ञान, संवाद और सूचना की दुनिया…

मुंशी प्रेमचंद: जिन्होंने आम आदमी को साहित्य का नायक बनाया

मुंशी प्रेमचंद हिन्दी साहित्य के वो युगपुरुष हैं, जिनकी लेखनी ने आम आदमी की पीड़ा, सामाजिक कुरीतियों और आज़ादी की भावना को शब्द दिए। उन्होंने उपन्यास, कहानी, नाटक और लेखों के माध्यम से साहित्य को जन-सरोकारों से जोड़ा और हिन्दी…

स्वस्थ और सुखी रहना है तो प्रकृति के साथ जीना होगा

28 जुलाई को मनाया जाने वाला ‘विश्व प्रकृति संरक्षण दिवस’ हमें इस सच्चाई से रूबरू कराता है कि लगातार मानवीय गतिविधियों और प्रकृति से छेड़छाड़ के चलते मौसम चक्र असंतुलित हो चला है। ग्लोबल वार्मिंग, बाढ़, सूखा, वनों की आग…

भोजन की थाली में छिपा ख़तरा : क्यों ज़रूरी है खाद्य सुरक्षा पर वैश्विक चेतना

दुनियाभर में हर दस में से एक व्यक्ति दूषित भोजन के कारण बीमार पड़ता है और हर साल लाखों लोगों की जान इससे चली जाती है। विश्व खाद्य सुरक्षा दिवस न केवल इस खतरे की ओर ध्यान दिलाता है, बल्कि…

साइकिल : तकनीक के युग में शून्य उत्सर्जन की वापसी

एक ज़माना था जब साइकिल केवल गरीबों या मध्यमवर्गीय परिवारों की सवारी मानी जाती थी, लेकिन समय के साथ इसकी पहचान पूरी तरह बदल गई। आज यह न सिर्फ एक स्वस्थ जीवनशैली का प्रतीक है, बल्कि पर्यावरण संरक्षण की दिशा…