कहा जाता है कि धरती की भी धारण करने की अपनी सीमा होती है। इस सीमा को पार करने के नतीजे जल, जंगल और जमीन की बौखलाहट के रूप में हम भुगत रहे हैं। हमारी लगातार बढ़ती आबादी साथ उसकी…
एक-के-बाद-एक राज्य में होती राजनीतिक धमाचैकड़ी क्या चुनाव सुधार की आसन्न जरूरत नहीं बता रही? आजकल मध्यप्रदेश में जारी सत्ता का सर्कस क्या चुनाव सुधारों से काबू में किया जा सकता है भारतीय राजनीति में अपराधी तत्वों की बढ़ती जा…
अदालतों में हिंदी और स्थानीय भाषाओं में कार्रवाई की मांग को लेकर बरसों से बहस चलती रही है, लेकिन अब सुप्रीमकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश की पहल पर इसे मंजूर किया गया है। न्याय की आस में अदालतों के दरवाजे ठक-ठकाते…