पर्यावरण संरक्षण की योजनाएं अक्सर समाज के हाशिए पर बसे लोगों को बेदखल करके बनती, बनाई जाती हैं, जबकि थोडी समझदारी रखी जाए तो उसी समाज की सहभागिता से पर्यावरण संरक्षण के साथ-साथ रोजगार भी पैदा किए जा सकते हैं।…
सर्वशक्तिमान अमरीका की एन नाक के नीचे बैठकर उसकी खामियों पर उंगली रखने वाले तीसरी दुनिया के देश क्यूबा को आर्थिक और राजनीतिक प्रतिबंधों के रूप में उसका खामियाजा भुगतना पडा है, लेकिन क्यूबा ने इस आपदा को अवसर में…
कोविड-19 के संकट ने एक बात तो उजागर कर ही दी है कि हमारी सरकारें महामारी तक में जरूरी आंकड़े संभाल नहीं पातीं। सरकारी और श्मशान-कब्रिस्तान से जुटाए गए मौत के आंकडों में जमीन-आसमान का अंतर इसकी एक बानगी है।…
आज के समय में अर्थ-व्यवस्था को लेकर दिए गए गांधीजी के विचारों की प्रासंगिकता उजागर होने लगी है। अनेक राष्ट्र-प्रमुखों से लगाकर चोटी के अर्थशास्त्रियों तक कई लोग हैं जिन्हें गांधी के आर्थिक विचारों पर भरोसा होने लगा है। इस…
पिछले साल-सवा साल से कोविड-19 संक्रमण दुनियाभर को हलाकान किए है, लेकिन क्या इसके चलते दूसरी बीमारियों की तरफ से मुंह फेरा जा सकता है? क्या आमतौर पर होने वाली बीमारियां, कोविड-19 की अफरातफरी में इलाज न मिलने के कारण…
दुनियाभर में कृषि का मौजूदा तरीका अब सवालों के घेरे में आता जा रहा है। उत्पादन में गैर-जरूरी वृद्धि पर आधारित यह तरीका पर्यावरण, पानी, जमीन, हवा जैसे कृषि के प्राकृतिक उपादानों को खतरे में डाल रहा है और कहीं-कहीं…
देशभर के राजनेता अपने-अपने राज्यों को पंजाब, हरियाणा बनाने के मंसूबे बांधते रहते हैं, लेकिन क्या आज का पंजाब अनुसरण लायक बचा है? साठ के दशक की भारी-भरकम लाभ-लागत वाली ‘हरित-क्रांति’ ने क्या पंजाब को अनुकरणीय उदाहरण की तरह बचने…
केन्द्र सरकार द्वारा बनाए गए दो कानूनों और एक संशोधन के विरोध में इन दिनों देशभर में किसानों ने आंदोलन खडे कर रखे हैं। इन आंदोलन की बुनियादी मांगों के साथ गांधी की तजबीज भी जुड जाए तो कैसा हो?…
एक जमाने में दुर्दान्त डाकुओं की शरण-स्थली की तरह ख्यात चंबल-घाटी की सम्पन्नता में बरसों पुरानी बीहडों की समस्या आडे़ आती रही है। इससे निपटने के लिए हवाई जहाजों से बीजों के छिड़काव से लगाकर भूमि-समतलीकरण तक सभी तरह के…
अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रम्प की कुछ महीने पहले की भारत-यात्रा से परवान चढ़ी भारत-अमेरिकी के बीच खुले व्यापार समझौते की बातचीत, अब लगता है, अपनी मंजिल तक पहुंचने वाली है। लेकिन क्या यह समझौता भारत सरीखे तीसरी दुनिया के देश के हित…