भारत डोगरा

आदिवासियों पर आधारित विकास : सच्ची खेती, सच्चा बचपन और सच्चा लोकतंत्र

स्थानीय ज्ञान, पडौस के संसाधन और समाज की देसी बनक के आधार पर विकास योजनाओं को रचा जाए तो नतीजा क्या, कैसा हो सकता है? इसे जानने के लिए भील आदिवासियों की ‘वागधारा’ जैसी संस्थाओं के काम पर नजर डालना…

Health Rights Act राजस्थान का स्वास्थ्य अधिकार कानून देश के लिए मील का पत्थर

जन स्वास्थ्य अभियान ने कहा कि भ्रामक अभियान चलाया जा रहा है कि विधेयक में डॉक्टरों की चिंताओं पर विचार नहीं किया गया। अभियान ने कहा कि राजस्थान सरकार ने इस कानून को तैयार करने में निजी डॉक्टरों के संघों…

असमानता की ‘ऑक्सफैम’ रिपोर्ट : अमीरों पर आरोपित हों भारी टैक्स

बेशर्मी से केन्द्रित होती पूंजी और व्यापक रूप से फलती-फूलती गरीबी ने हमारे यहां जिस तरह की अश्लील गैर-बराबरी को खडा कर दिया है उससे निपटने की तजबीज आखिर कौन देगा? ‘ऑक्सफैम’ सरीखे वैश्विक एनजीओ मानते हैं कि अकूत सम्पत्ति…

मध्यकालीन इतिहास में मोहब्बत के संदेश

जातियों और धर्मों में विभाजित हमारे समाज का एक बडा संकट, एक-दूसरे की अज्ञानता से उपजी हिंसक असहमतियां भी हैं। कतिपय राजनीतिक जमातें इसी अज्ञानता का लाभ लेकर लोगों को एक-दूसरे के खिलाफ भडकाती रहती हैं। मसलन – मध्यकालीन इतिहास…

समाज में धर्म : करुणा से करीबी और कट्टरता से किनारा

इस समय में भी धर्म को लेकर कट्टरता और क्रूरता, संकीर्णता और अंधविश्वास की प्रवृत्तियां जोर पकड़ रही हैं। ऐसे समय में जब धर्म आपस में वैमनस्यता बढाने के लिए उपयोग किए जा रहे हों, कैसे धर्म की जरूरत होगी?…

विकास : प्रगति की पहचान के सूत्र

इंसानी तरक्की को मापने के लिए ‘सकल घरेलू उत्पाद’(जीडीपी) जैसे जिन पैमानों का उपयोग किया जा रहा है, क्या वे सचमुच हमारे विकास को बता पाते हैं? क्या इनसे समाज में मौजूद गैर-बराबरी, अन्याय, हिंसा, शोषण आदि को भी मापा…

विचार शख्सियत

भारत डोगरा : पचास साल का ‘स्वतंत्र लेखन’

पत्रकारिता में शुरुआत से ही एक विधा रही है, ‘फ्री-लांस’ या स्वतंत्र लेखन व मीडिया-कर्म की। यह लेखन बिना किसी मीडिया संस्थान से औपचारिक सम्बन्ध बनाए लगातार लिखने और जीवन-यापन करने पर आधारित रहता है। ऐसे ही एक लेखक-मित्र हैं,…

रूस-यूक्रेन युद्ध के ग्यारह तथ्य

दो महीनों से ज्यादा समय से जारी रूस-यूक्रेन युद्ध ने अब समूची दुनिया के सामने कुछ कठिन सवाल खडे कर दिए हैं। इस समय यह बहुत जरूरी है कि निष्पक्षता के आधार पर यूक्रेन युद्ध पर एक सुलझी हुई समझ…

पर्यावरण : नदी-कटान की चपेट में जीवन

देशभर में नदियों को जीवन-दायिनी माना जाता है, लेकिन कई इलाकों में वे काल बनकर भी आती हैं। देश में नदी-तट के कई ऐसे क्षेत्र हैं जहां नदियों के बहाव से लगातार जमीन कटती जा रही है। उपलब्ध अनुमानों के…

स्वास्थ्य : खाने के खतरे

उद्योगों और उनसे खडी की जाने वाली पूंजी का ताजा शिकार खाद्य-प्रसंस्करण उद्योग हुआ है। इस प्रक्रिया में पहले खाद्य पदार्थों को बाजार के लिहाज से चमकदार बनाने के लिए उनकी पौष्टिकता कम या खत्म की जाती है और फिर…