वर्ष 2025 के अंत और 2026 के आरंभ के साथ दुनिया एक गहरे संकट के दौर से गुजर रही है। बढ़ती असमानताएँ, गंभीर होता पर्यावरण संकट, निशस्त्रीकरण में पीछे हटना और एआई–आधारित हथियारों का प्रसार मानवता के सामने नई चुनौतियाँ…
महात्मा गांधी की प्रिय बकरी की हैसियत जानना हो तो किसी भी आदिवासी समाज में चले जाइए। वहां बकरी न सिर्फ दुधारू जानवर, बल्कि लगभग बेंक का दर्जा रखती है। वक्त-बेवक्त जरूरत पड़ने पर बकरी बेचकर लोग अपना काम चला…
हम चाहें या ना चाहें, इंसानियत को बचाए रखने के लिए अहिंसक, लोकतांत्रिक और मानवीय प्रयासों की ही जरूरत पड़ती है। ये प्रयास सामूहिक हों तो और बेहतर। ऐसे प्रयासों को कारगर बनाने के लिए उन्हें लगातार याद करते रहना…
कुछ साल पहले हमारे जीवन को आसान बनाने की खातिर आए मोबाइल फोन ने अब अपनी तकनीक से कई तरह के संकट खड़े कर दिए हैं। इनमें से एक है, ‘ऑन लाइन गेमिंग’ जिसने बच्चों तक को अपनी चपेट में…
हमारी आजादी के आंदोलन में अनेक जीवट की शख्शियतों ने हिस्सेदारी की थी। उनमें से एक थे – गणेश शंकर विद्यार्थी। हमारी पत्रकारिता की शुरुआत विद्यार्थी जी सरीखे निष्ठावान संपादकों से हुई थी, लेकिन वे आजादी के एक ऐसे सिपाही…
आजादी के बाद जिस अवधारणा को बार-बार याद करने की जरूरत है, वह स्वराज है। गांधी की मार्फत आई हमारे देसी समाज की यह अवधारणा अनेक संकटों की समझ देकर उनसे निजात दिला सकती है। कुछ समाजसेवी हैं जो यदा-कदा…
दुनिया भर के जीवन पर मंडराते जलवायु परिवर्तन और परमाणु हथियारों के खतरों से कैसे निपटा जा सकता है? क्या इसके लिए ‘विश्व-सरकार’ का गठन कारगर हो सकता है? कैसी हो सकती है, ऐसी सरकार? इसी की पड़ताल करता भारत…
इस समय विश्व में लगभग 13000 परमाणु हथियार है जो मनुष्यों समेत धरती के अधिकांश जीवों को अनेक बार नष्ट करने के लिए पर्याप्त हैं। सबसे बड़े दुख और आश्चर्य की बात है कि ऐसी खतरनाक स्थितियों की जानकारी बार-बार…
अपने रोजमर्रा के आम-फहम जीवन से लगाकर दुनिया भर के ताने-बाने तक, गांधी की दखल बेहद प्रासंगिक और जरूरी दिखाई देती है। एक लिहाज से देखें तो स्थानीय से लगाकर वैश्विक समाज तक, गांधी से कुछ-न-कुछ सीख-समझ सकता है। कैसे…
दबावों के बावजूद यूरोपियन यूनियन (ईयू) के 27 देशों समेत कई देशों में प्रतिबंधित ‘जीनेटिकली मॉडीफाइड’ फसलों को दुनियाभर में पैदावार बढ़ाने के तर्क की बुनियाद पर फैलाया जा रहा है, हालांकि सब जानते हैं कि इसके पीछे अमरीकी बहुराष्ट्रीय…