शिक्षा के क्षेत्र में कई नायाब प्रयोग हुए हैं और उनमें से कईयों ने हमें शिक्षण की पद्धतियों का दर्शन भी कराया है। कर्नाटक का ‘नीलबाग स्कूल’ इन्हीं में से एक है। यह सत्तर- अस्सी के दशक में चलने वाला…
बरसों-बरस के अनुभव और तौर-तरीकों से विकसित हुई कृषि पद्धतियों में उत्तराखंड सरीखे पहाडी इलाकों की ‘बारहनाजा’ पद्धति भी है जिसमें स्थानीय संसाधनों, बीजों और पौष्टिकता से भरपूर उत्पादन इंसानों, पशुओं और जीव-जन्तुओं का पेट भरती है। खेती-किसानी के आर्थिक…
हमारे देश में सभी त्यौहार खेती-किसानी से सीधे जुड़े रहे हैं, लेकिन हाल के वर्षों में बाजारों की आमद ने इन्हें उपभोग के रंग-बिरंगे बाजारू अवसरों में तब्दील कर दिया है। अब कोई अपने त्यौहारों तक पर कृषि की सुध…
करीब ढ़ाई दशक पहले शुरु हुए ‘जन स्वास्थ्य सहयोग’ ने छत्तीसगढ़ के सुदूर कोने में जिस तरह से, जो-जो किया है, वह हमारे इलाज और स्वस्थ्य रहने के सरकारी, गैर-सरकारी और व्यावसायिक प्रतिष्ठानों को सिखा सकता है। उम्मीद की जानी…
अपनी समझ और संसाधनों की उपलब्धता के चलते किसान कई बार खेती की ऐसी पद्धति वापरते हैं जिससे एक तरफ तो पर्यावरण का संरक्षण होता है और दूसरी तरफ, जीवन जीने लायक उपज मिल जाती है। हिमालय के सुदूर ग्रामीण…
आज के समय की अधिकांश समस्याएं अप्राकृतिक जीवन-पद्धति ने खडी की हैं। इसे समझने और फिर प्राकृतिक जीवन जीने के लिए कुछ व्यक्तियों, संस्थाओं की पहल काबिल-ए-गौर हैं। केरल का ‘फार्मर शेयर’ और उसके अम्ब्रोज़ कूलियत उनमें से एक हैं।…
‘मालवा के कबीर’ के नाम से मशहूर लोक गायक कालूराम बामनिया को पदमश्री अवार्ड से सम्मानित करने की घोषणा गणतंत्र दिवस के मौके पर की गई है। देवास जिले के टोंकखुर्द के रहने वाले कालूराम पारंपरिक निर्गुण भक्ति के गायक…
पक्षियों और आसपास के जीव-जन्तुओं को जानना-समझना इंसानी वजूद के लिए बेहद उपयोगी होता है, लेकिन आजकल की आपाधापी में हम इसे भूलते जा रहे हैं। पक्षियों से कैसे दोस्ती बनाए रखी जा सकती है? पक्षी-प्रेमी डॉ. लोकेश तमगीरे से…
‘राजस्थान की रजत बूंदें’ सरीखी नायाब किताब लिखने वाले अनुपम मिश्र कहा करते थे कि जिस इलाके में प्रकृति ने पानी देने में थोड़ी कंजूसी की है, वहां समाज ने पानी की एक-एक बूंद को प्रसाद मानकर बेहद सलीके से…
अरविंद ओझा का जीवन सरल, सहज व सादगीपूर्ण था। वे जमीनी सामाजिक कार्यकर्ता तो थे ही पर उनकी पठन-पाठन में गहरी रूचि थी। उन्हें यहां गुरूजी के नाम से जाना जाता था। वे कहानीकार व कवि भी थे। वे बहुत…