विचार

कोविड-19 राहत कोष को निरर्थक बनाते बैंक चार्जेस

कोविड-19 राहत कोष को निरर्थक बनाते बैंक चार्जेस

बैंकिंग हमारी अनिवार्य ज़रूरत बन गई है। लेकिन आप जानते ही है कि ये ज़रूरत मुफ्त में पूरी नहीं होती। इसके लिए हर कदम पर चार्जेस लिये जाते है और खाते से पैसा कटता रहता है। हरेक सुविधा के लिए...

शिवानी द्विवेदी

बैंकिंग हमारी अनिवार्य ज़रूरत बन गई है। लेकिन आप जानते ही है कि ये ज़रूरत मुफ्त में पूरी नहीं होती। इसके लिए हर कदम पर चार्जेस लिये जाते है और खाते से पैसा कटता रहता है। हरेक सुविधा के लिए अलग अलग चार्जेस चुकाने पड़ते हैं। बैंक द्वारा दी जाने वाली सेवाओं से भले ही ग्राहक ख़ुश हो, लेकिन उसके पीछे की चीज़ों को जानकर, भांपकर ही ग्राहक को कोई कदम उठाना चाहिए। देश में ‘नो बैंक चार्जेस अभियान’ चलाया जा रहा है। इसके विरोध में आमजन आवाज उठा रहा है। कोराना काल में श्रमिकों, मजदूरों को दी गई सहायता राशि बैंक चार्जेस के नाम पर बैंकों ने वसूली ली।

वैश्विक महामारी कोरोना वायरस के बढ़ते मामलों के कारण देश के प्रधान मंत्री ने 24 मार्च, 2020 को पूरे देश मे लॉकडाउन की घोषणा की। इसकी वजह से सभी काम, व्यवसाय और अर्थव्यवस्था पर भारी असर पड़ा और लोगों की नौकरियाँ एवं आजीविका समाप्त होने लगी। इसके परिणामस्वरूप विभिन्न राज्यों (मुख्य रूप से बड़े शहरों) से हजारों दिहाड़ी मजदूर अपने घर खाली पेट, हजारों मील पैदल चल के वापस जाने लगे हैं।

राहत कोष के रूप में कुछ राज्य सरकारों ने 1000 रुपये की राशि मजदूरों के बैंक खातों में डलवाने की घोषणा की। हालाँकि वे जिस तरह के विनाशकारी संकट से जूझ रहे थे, उसकी तुलना में राहत राशि की मात्रा पहले से ही बहुत कम थी, लेकिन फिर भी जब यह पैसा श्रमिकों के बैंक खातों में आया, तो बैंकों ने पूरी राशि बैंक के सेवा शुल्क के नाम पर काट लिया। ये शुल्क लगभग सभी बैंकिंग सेवाओं का लाभ उठाने के लिए बैंकों द्वारा लगाया जाता हैं जैसेकि आवश्यक न्यूनतम राशि न बनाए रखने के लिए, नकद निकासी/जमा, एसएमएस अलर्ट, बैलेंस पूछताछ, पासबुक अपडेट आदि के लिए। पूरी राहत राशि काट लेना स्पष्ट रूप से बैंकिंग सेवाओं के नाम पर बैंकों द्वारा शुरू किए गए अनेक चार्जेस के विशाल स्तर को दर्शाता है।

See also  ‘डूबत खातों’ की भरपाई के लिए बैंकों ने लगाए मनमाने शुल्क

वर्तमान स्थिति को देखते हुए वित्त मंत्री निर्मला सीतारमन ने भी 24 मार्च, 2020 को यह एलान किया था कि अगले 3 महीनों तक कोई भी बैंक चार्जेस नहीं लगाया जाएगा। लेकिन इस घोषणा के बाद भी, उन्होंने जमाकर्ताओं के बचत खातों से कोई चार्जेस लेना बंद नहीं किया। हाल ही में प्रवासी मजदूरों के ऐसे कई मामले सामने आए हैं, जिनकी न्यूनतम शेष राशि न होने एवं अन्य बैंकिंग सेवाओं के नाम पर लगभग पूरी राहत राशि बेरहमी से काट ली गई। इन लोगों पर ऐसे चार्जेस लगाना पूरी तरह से अतार्किक और अनुचित है क्योंकि यह श्रमिकों  का एक ऐसा वर्ग हैं जिनके पास कोई बचत नहीं होती, जो अपने परिवारों के साथ घरों को लौटने के लिए कई दिनों तक भूखे प्यासे हजारों मील पैदल सिर्फ इसलिए चले क्योंकि उनकी जेब में एक भी रुपये नहीं था।

इसलिए यह बात साफ है कि सरकार के अपने किसी भी बयान का कोई महत्व नहीं है। उनका अंतिम उद्देश्य किसी भी कीमत पर उस घाटे (एनपीए) से उभरना है जो कि उन्हें कॉर्पोरेट और उद्योगों को दिए गए भारी कर्ज़ो को माफ करने के कारण हुआ है।

ऐसी विपत्ति के समय में, जब श्रम प्रवासियों को बिखरती अर्थव्यवस्था के कारण सबसे अधिक परेशानी झेलनी पड़ रही है, तब सरकार को न केवल वित्तीय राहत कोष की घोषणा करनी चाहिए, बल्कि उन्हें वास्तविक रूप से लागू भी करना चाहिए।

इसलिए ‘नो बैंक चार्जेस’ अभियान के माध्यम से मांग की गई है कि प्रधानमंत्री, भारतीय रिजर्व बैंक और भारत सरकार को न केवल 3 महीने के लिए बैंक चार्जेस हटाना चाहिए बल्कि उन्हें स्थायी रूप से सभी चार्जेस को समाप्त कर देना चाहिए ।  बैंक शुल्क हटाने की मांग करने के लिए, अपने बैंक, भारतीय रिजर्व बैंक और वित्त मंत्री को www.fanindia.net से ईमेल भेजे जाने चाहिए।  ‘नो बैंक चार्जेस ’अभियान में देश के जाने माने सामाजिक कार्यकर्त्‍ताओं ने भी इसके विरोध में अपनी आवाज उठाई है। आम जन से भी आव्‍हान है कि  वे इसके विरोध में अपना स्‍वर भी मिलाएं इसके लिए  www.fanindia.net  पर जाकर ‘नो बैंक चार्जेस ’अभियान में अपनी सहभागिता दर्ज करा सकते है।

See also  'जनता संसद' में स्वास्थ्य सेवा का अधिकार की मांग उठी, स्वास्थ्य प्रस्ताव पारित

जुड़ें - हमारे व्हाट्सएप चैनल से

सप्रेस मीडिया - नवीनतम आलेख, रिपोर्ट, समाचार अपडेट सीधे अपने व्हाट्सएप पर प्राप्त करें।

व्हाट्सएप ग्रुप से जुड़ें →

निष्पक्ष पत्रकारिता का समर्थन करें

आज के दौर में निष्पक्ष, स्वतंत्र और जन-सरोकार की पत्रकारिता को जीवित रखना बड़ी चुनौती है। विज्ञापनदाताओं और कॉर्पोरेट के दबाव से मुक्त होकर आप तक सही और सटीक खबरें पहुंचाना हमारा मुख्य उद्देश्य है। हमारी स्वतंत्रता को बनाए रखने के लिए आपके आर्थिक सहयोग की आवश्यकता है। आपकी दी हुई छोटी-सी सहयोग राशि हमें सच्ची पत्रकारिता करते रहने का संबल देगी।

सहयोग राशि →

नवीन आलेख