पेड़ों की मां : दीर्घजीवी सालूमरदा थिमक्का

डॉ. ओ. पी. जोशी

पेड़ों की मां (मदर ऑफ़ द ट्रीज) के नाम से प्रसिद्ध गरीब एवं अनपढ़ सालूमरदा थिमक्का का 114 वर्ष की आयु में बैंगलूरू के निजी अस्‍पताल में 14 नवंबर 25 को निधन हो गया। उन्‍हें आलामरदा थिमाका नाम से भी जाना जाता था। कन्‍नड़ भाषा में सालुमरदा का मतलब पेड़ों की कतार बताया गया है। थिमाका का जन्‍म 30 जून 1911 को तुमकुरू जिले के गब्‍बी तालुका के  गांव कुमकुरू के एक गरीब परिवार में हुआ था। किसी भी प्रकार की कोई औपचारिक शिक्षा प्राप्‍त नहीं की एवं कम उम्र में ही आसपास की खदानों में मजदूरी का कार्य किया। बिकाला चिकव्‍या से विवाह के बाद 25-26 वर्षों तक कोई संतान नहीं होने से थिमाका निराश रहती थी एवं आसपास के लोग उसे अपशकुनी महिला मानते थे। निराशा से परेशान हो सालूमरदा थिमक्का ने एक दिन अपने घर से दूर एक बरगद का पौधा लगाया एवं नियमित उसकी देखभाल एक बच्‍चे के समान करने लगी। बढ़ते पेड़ को देखकर वह खुश रहने लगी और बरगद के अन्‍य पेड़ किसी स्‍थान पर लगाने का निश्‍चय किया।  

बैंगलूरू से 70 किलोमीटर दूर गांव हुलिकल तथा कुडुर के मध्‍य 40 किलोमीटर के बंजर राजमार्ग पर लगभग 400 बरगद के पौध रोपकर उन्‍हें पेड़ बनाया। इस अथक प्रयास से उजाड़ राजमार्ग का यह क्षेत्र हराभरा एवं छायादार हो गया। वह नियमित मजदूरी पर जाती, घर का काम करती एवं इसके बाद अपने पौधों की देखभाल करती। वर्ष 1991 में पति की मौत के बाद 75 रूपये प्रतिमाह पेंशन मिलने लगी। इतनी कम राशि में घर चलाकर बाद में पौधे खरीदना संभव नहीं था, अत: सालूमरदा थिमक्का इधर उधर प्राकृतिक रूप से उगे बरगद के पौधों को सावधानी से निकालकर एकत्र करती एवं फिर उचित स्‍थान रोपण। इस प्रकार वहां के गांवों के आसपास धीरे धीरे 8000 बरगद के पौधे लगाकर अपनी मेहनम से पेड़ बनाये।   

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इस कार्य से उन्‍हें पेड़ों की मां के नाम से प्रसिद्धि मिली। एक पत्रकार से साक्षात्कार में उन्होंने कहा था कि मेरे पेड़ रूपी बच्‍चों को लहलहाते  देख मेरी खुशी का ठिकाना नहीं रहता। पर्यावरण संरक्षण एवं जागरूकता पर आधारित एक फिल्‍म भी उनके जीवन पर बनायी गयी थी। राज्‍य सरकार के वृक्ष प्रेमी सम्‍मान के अलावा उन्‍हें कई अन्‍य पुरस्‍कार एवं सम्‍मान से नवाजा गया था, इनमें कुछ प्रमुख है- राष्ट्रीय नागरिक (1995),  इंदिरा प्रियदर्शनी वृक्ष मित्र (1997), नाजोदा ( हम्‍पी विवि, 2010),पदमश्री ( 2019), मानद डाक्‍टरेट( कनार्टक केंद्रीय विवि, 2020), तथा हीरो फार टुडे ( रीडर्स डाइजेस्‍ट), वर्ष 2016 में विश्‍व की 100 प्रभावशाली महिलाओं की सूची में शामिल किया गया था।

वर्ष 2019 में तत्कालीन राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद से पदमश्री पुरस्‍कार लेते समय उनके सिर पर हाथ रचा आशीर्वाद देने का विडियो काफी वायरल हुआ था। उनके सम्‍मान में कैलिफोनिया में एक पर्यावरण संस्‍था का नाम थिमाका  रिसोर्सेज फार एनवायरोमेंटल स्‍टडीज रखा गया।

सालूमरदा थिमक्का के निधन पर कर्नाटक के मुख्‍यमंत्री सिद्धारमैया तथा पर्यावरण मंत्री ईश्‍वर खंडू ने उन्‍हें अमर पर्यावरण प्रहरी बताया। सालूमरदा थिमक्का का जीवन यह दर्शाता है कि पर्यावरण संरक्षण के कार्य में आर्थिक स्थिति, शिक्षा एवं उम्र आदि कोई मायने नहीं रखती, बस जूनुन होना चाहिए। यह महज एक संयोग है कि पेड़ों में दीर्घजीवी बरगद को लगाते लगाते वे भी 114 वर्ष की उम्र पाकर दीर्घजीवी हो गयी।

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