साबरमती आश्रम के स्वरूप में बदलाव के खिलाफ प्रार्थना और संकल्प के साथ शुरू हुई सेवाग्राम-साबरमती संदेश यात्रा

सेवाग्राम, 17 अक्टूबर 21 । केंद्र और गुजरात राज्य सरकार द्वारा महात्मा गांधी के विश्व प्रसिद्ध साबरमती आश्रम के स्वरूप में बदलाव की कोशिश के विरुद्ध आज देश भर की प्रमुख गांधीवादी संस्थाओं ने सेवाग्राम आश्रम से साबरमती संदेश यात्रा शुरू की। 50 से अधिक यात्रियों द्वारा सुबह सेवाग्राम स्थित बापू कुटी में प्रार्थना की गई और इस संकल्प के साथ यात्रा शुरु की गई कि स्वतंत्रता आंदोलन की विरासत और बापू की धरोहरों के साथ खिलवाड़ नहीं होने देंगे। सत्ता के ऐसे किसी भी प्रयास को विफल करने के लिए वे जनता के बीच जाएंगे और लोकमत का जागरण करेंगे ।

सेवाग्राम से साबरमती संदेश यात्रा के संयोजक संजय सिंह ने बताया कि सेवाग्राम आश्रम से शुरू हो रही यह यात्रा अमरावती, अकोला, खामगांव, भुसावळ, जळगांव, अमलनेर, धुले, नदुरबार, बारडोली, सूरत होते हुए 23 अक्तूबर को अहमदाबाद पहुंचेगी। यात्रा में प्रमुख रूप से गांधी शांति प्रतिष्‍ठान, नईदिल्‍ली के कुमार प्रशांत, केंद्रीय गांधी स्‍मारक निधि के अध्‍यक्ष रामचंद्र राही, मंत्री संजय सिंह, पर्यावरणविद राजेंद्र सिंह, नई तालीम समिति, सेवाग्राम के सुगन बरंठ, आशा बोथरा, सर्व सेवा संघ के अशोक भारत, राष्‍ट्रीय युवा संगठन के विश्वजीत रॉय, शिवी जोसेफ, सांडिल्य, अजय श्रीवास्तव, मृत्युंजय, अवीनाश केकड़े, जालंधर भाई, मालती बहन, अरविंद कुशवाहा, आबिदा बेगम, गोपाल सरन, भूपेश भूषण आदि सहित 50 गाँधीजन शामिल हैं।

इस अवसर पर गांधीजनों ने कहा कि महात्मा गांधी द्वारा स्थापित आश्रम तथा संस्थाएं सत्य और अहिंसा की प्रयोगशालाएं रहीं हैं । जीवन और समाज का आदर्श रूप कैसा हो इसकी साधना उन्होंने आश्रमों में कीं और अपने साथ – साथ असंख्य मानवों को प्रेरित व प्रशिक्षित किये। उनके बाद भी उनके आश्रम उनकी विचारधारा और जीवन शैली को जानने-समझने और प्रेरणा प्राप्त करने के पवित्रतम स्थल रहे हैं। जिनके प्रति देश और दुनिया के असंख्य नर-नारी गहरी आस्था रखते हैं। यही वजह है कि गांधी आश्रमों में दुनिया भर से लोग शांति और प्रेरण की तलाश में खिंचे चले आते हैं ।

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साबरमती आश्रम गांधीजी का अत्यंत महत्वपूर्ण स्थान है। हाल ही में जानकारी मिली है कि केंद्र सरकार साबरमती आश्रम परिसर की स्वरुप में तब्दीली कर, सादगी में सौंदर्य की विचारधारा और विरासत की पवित्रता पर सीधा आघात है। इसके कारण साबरमती आश्रम का न सिर्फ मूल रूप  ही खत्म हो जाएगा, जो देश ही नहीं दुनिया की ऐतिहासिक धरोहर है।

गांधी जनों ने कहा कि यह समझ लेना होगा कि बाजार केन्द्रित, भोगवादी जिस सभ्यता से गांधी जी आजीवन लड़े आज उसी बाजार को आश्रम में प्रवेश दिलाने के लिए विकास  को आगे किया जा रहा है, जो नाकाबिले बर्दाश्‍त है। भारतीय स्वतंत्रता के हीरक जयंती वर्ष के पवित्र और ऐतिहासिक अवसर पर गांधीजी की स्मृति के संरक्षण और राष्ट्र निर्माण के लिए उनके द्वारा चलाए गए रचनात्मक  कार्यक्रमों का उन्नयन करने की बजाय उनके पगचिन्ह मिटाने तथा भावी पीढ़ी से गांधी विचार परम्परा और विरासत को काटने के लिए उनके स्मृति स्थलों को तहस–नहस  करने की ये साजिश है।

जिस तरह अमृतसर के जालियांवाला बाग को पर्यटन स्थल में तब्दील कर वहां का भावनिक और प्रेरणात्मक  वातावरण खत्म किया गया है, उसी तर्ज पर साबरमती आश्रम को बर्बाद करने की दिशा में कदम बढ़ाया जा रहा है। यह इतिहास मिटाने और सुविधानुसार बदलने की आशंका का ठोस आधार है ।

सेवाग्राम साबरमती संदेश यात्रा के संयोजक संजय सिंह ने जानकारी देते हुए बताया कि आयोजन में गांधी स्मारक निधि, गांधी शांति प्रतिष्ठान, सर्व सेवा संघ, सेवाग्राम आश्रम प्रतिष्ठान,सर्वोदय समाज, राष्ट्रीय गांधी संग्राहलय, नई तालीम समिति, राष्ट्रीय युवा संघठन, जल बिरादरी, महाराष्ट्र सर्वोदय मंडल तथा गुजरात की सर्वोदय संस्थायें शामिल हैं। यात्रा में जगह जगह सर्व धर्म प्रार्थना, गोष्ठी, जन संवाद एवं आदि कार्यक्रम आयोजित किये जायेंगे ।

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