आधुनिक विकास के तमाम-ओ-तमाम खटरागों की तरह हमारे यहां खेती भी दिनों-दिन बदहाल होती जा रही है। कमाल यह है कि इस बदहाली को समाज, सरकार और सेठ की हैसियत के नागरिक विकास मानते और जपते रहते हैं। सवाल यह…