इज़राएल और अमेरिका द्वारा किये जा रहे जनसंहार को तत्काल समाप्त करने की माँग नई दिल्ली। इंडो-फ़लस्तीन सॉलिडेरिटी नेटवर्क (IPSN) के एक प्रतिनिधिमंडल ने हाल ही में (22 अप्रैल 2025) को भारत में फ़लस्तीन के नवनियुक्त राजदूत श्री अब्दुल्ला अबू शावेश…
जब तेल की समृद्धि पर सवार अरब देशों को चौथी दुनिया कहकर नई वैश्विक शक्ति माना गया था, तब भी किशन पटनायक ने उसे मृगमरीचिका कहा था। आज ट्रम्प की ‘अमेरिका फर्स्ट’ नीति, व्यापार युद्ध और आत्मघाती फैसले उसी तरह…
आउटर रिंग रोड के भूमि अधिग्रहण के विरोध में 15 माह चले आंदोलन के बाद किसानों को बड़ी जीत मिली। बढ़ी हुई गाइडलाइन के आधार पर अब उन्हें दो गुना मुआवज़ा मिलेगा। यह संघर्ष सिर्फ मुआवज़े की राशि नहीं, बल्कि…
बैसरन घाटी में पर्यटकों पर हुआ आतंकी हमला देश को झकझोर गया है। सरकार ग़ुस्से में है और कड़ी कार्रवाई के संकेत दे रही है। हमले में 26 लोगों की जान गई। जवाबी कार्रवाई की बातों के बीच सवाल यह…
भारत गांवों का देश है, जहां पंचायती राज प्रणाली लोकतंत्र की जड़ें मजबूत करती है। यह प्रणाली स्थानीय स्वशासन, महिलाओं की भागीदारी और समावेशी विकास का माध्यम है। परंतु आज भी ग्राम पंचायतें अधिकारों के प्रयोग और महिला प्रतिनिधियों की…
सिर्फ तीन महीना पहले दूसरी बार अमेरिकी राष्ट्रपति बने डोनॉल्ड ट्रम्प ने जो कारनामे कर दिए हैं उनसे समूची दुनिया हलाकान है। ‘अमरीका को फिर से महान’ (‘मेक अमरीका ग्रेट अगेन’ यानि ‘मागा’) बनाने की खब्त में उन्होंने आर्थिक ताने-बाने…
इंदौर, 23 अप्रैल। पद्मश्री डॉ. जनक पलटा मगिलिगन के दिवंगत पति, ऑर्डर ऑफ ब्रिटिश एम्पायर से सम्मानित जेम्स (जिम्मी) मगिलिगन की 14वीं पुण्यतिथि पर आयोजित ‘सस्टेनेबल डेवलपमेंट सप्ताह’ का समापन ग्राम सनावादिया स्थित उनके निवास गिरिदर्शन में एक प्रार्थना सभा…
राज्य सरकार द्वारा सुप्रीम कोर्ट के आदेशों की लगातार अनदेखी अहमदाबाद/नई दिल्ली, 23 अप्रैल। गुजरात के प्रतिष्ठित सेठ वादीलाल साराभाई (वी.एस.) अस्पताल में बड़े पैमाने पर अनैतिक दवा परीक्षण का मामला उजागर हुआ है। प्राप्त रिपोर्टों के अनुसार, इस अस्पताल…
भोपाल में ‘गांधी का लोकतंत्र’ विषय पर व्याख्यान भोपाल, 22 अप्रैल। “लोकतंत्र को केवल चुनाव और बहुमत तक सीमित कर देना, उसे आत्मा-विहीन बना देना है। यह जीवन की ऐसी शैली है, जो सत्य, सह-अस्तित्व, संवाद और असहमति को सम्मान…
तकनीकी प्रगति और आर्थिक विकास की इस दौड़ में एक ऐसी आवाज़ है जिसे बार-बार अनसुना किया जाता है—जंगलों की। ये जंगल, जो सिर्फ पेड़ों का समूह नहीं बल्कि जीवन का आधार हैं, हर दिन विकास की कीमत चुका रहे…